Skip to main content

जम्मू कश्मीर: पहाड़ियों को एसटी के दर्जे के खिलाफ क्यों हैं गुज्जर-बक्करवाल?

Posted on November 10, 2022 - 11:39 am by

पहाड़ी समुदाय के लोगों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जे की घोषणा के बाद प्रदेश के गुज्जर-बकरवाल समुदाय में आक्रोश है. गुर्जर और बकरवाल समुदायों के सदस्यों ने इसके ख़िलाफ 4  नवंबर को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले से पैदल मार्च निकाला था. मार्च करते हुए 10 नवंबर को ट्राईबल बचाओं मोर्चा श्रीनगर पहुंचा. सदस्यों ने बताया कि अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए वह इस पैदल मार्च को लखनपुर तक ले जाएंगे.

क्या पूरा मामला

बता दें कि हाल ही में NCST ने जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी समुदाय को एसटी सूची में शामिल करने के प्रस्ताव का समर्थन किया था, यह तब है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जम्मू कश्मीर के दौर में पहाड़ी समुदाय के लोगों को एसटी सूची में डालने की घोषणा की थी. यह जस्टिस जी डी शर्मा के सिफारिस से संबधित है. केंद्र शासित प्रदेश में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए गठित आयोग से पहाड़ी समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने का सुझाव आया था. जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जी डी शर्मा ने की थी. ट्राईबल बचाओं मार्च के द्वारा गुज्जर बकरवाल समुदाय के सदस्यों के द्वारा जी डी शर्मा के सिफारिसों का विरोध किया जा रहा है.

कठुआ के लखनपुर तक चलेगा यह मार्च

पहाड़ियों को एसटी के दर्जे की सिफारिश के खिलाफ आवाज उठाने के लिए गुज्जर बकरवाल समुदाय द्वारा एक ज्वाइंट एक्शन कमेटी (जेएसी) का गठन किया था. जिसमें गुर्जर-बकरवाल कॉन्फ्रेंस जम्मू कश्मीर, गुर्जर-बकरवाल यूथ वेलफेयर कॉन्फ्रेंस, ऑल ट्राइबल कोऑर्डीनेशन कमेटी,  इंटरनेशनल गुज्जर महासभा व गुज्जर-बकरवाल स्टूडेंट यूनियन और निर्वाचित प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं सहित कई समूहों के सदस्य शामिल हैं. जनजातीय कार्यकर्ता और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की जनजातीय शाखा के युवा अध्यक्ष एवं जेएसी के प्रवक्ता तालिब हुसैन ने बताया कि कुपवाड़ा से ट्राइबल बचाओ मार्च की शुरुआत हुई. यह कठुआ के लखनपुर तक चलेगा.

उच्च जाति को एसटी का दर्जा देना गलत

इस दौरान जहां भी ट्राइबल पापुलेशन है,  उन इलाकों से होते हुए हम जम्मू पहुंचेंगे. उन्होंने कहा कि इस मार्च को निकालने का मकसद यह है कि जो उच्च जाति के लोगों को एसटी का दर्जा दिया जा रहा है,  उसके खिलाफ आवाज उठाना है. पहाड़ियों को जो एसटी का दर्जा दिया गया और जो यह प्रक्रिया चल रही है हम उसके खिलाफ हैं.

protest/twitter

उन्होंने कहा भारतीय संविधान के अनुसार ट्राइबल का दर्जा दिए जाने के लिए 5 मानदंड रखे गए हैं. इन पांचों मानदंडों को जो भी पूरा करता है उसे यह दर्जा दिया जाएगा.

जैसे गद्दियों का किया,  वो हिन्दू थे लेकिन हमने कभी ऐतराज नहीं किया. तालिब ने कहा कि इस कमेटी के तहत यह दर्जा हासिल करने के लिए विशिष्ट संस्कृति,  भौगोलिक अलगाव,  बड़े पैमाने पर समुदाय के साथ संपर्क की शर्म और पिछड़ापन होना जरूरी है.

यह मार्च संविधान बचाओं मार्च है

इसके बावजूद पहाड़ियों को दर्जा देने के लिए भारतीय संविधान को एक तरफ रखते हुए गैर-ट्राइबल लोगों को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह मार्च भारतीय संविधान बचाओ मार्च भी है. हमारी एक  ही मांग है कि उच्च जाति के लोगों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए.

No Comments yet!

Your Email address will not be published.