Skip to main content

झारखंड: एक्सआइएसएस में डॉ कुमार सुरेश सिंह ट्राईबल रिसोर्स सेंटर का उद्घाटन

Posted on November 17, 2022 - 11:46 am by

रांची के जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोसल सर्विस में बुधवार को डॉ कुमार सुरेश सिंह ट्राईबल रिसोर्स सेंटर की शुरुआत हुई. राज्य के वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव और राज्य सभा सांसद महुआ मांजी ने डॉ सिंह की 89वीं जयंती पर केंद्र का उद्घाटन किया. केंद्र का संचालन संस्था के फादर माइकल अलबर्ट विंडी एसजे मेमोरियल लाइब्रेरी में होगा.

राज्य के इतिहास के लिए डॉ सिंह की किताबें उपयोगी

डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि पलामू के पूर्व डीसी सह दक्षिण छोटानागपुर के कमिश्नर रहे डॉ कुमार सुरेश सिंह झारखंड के इतिहासकार के रूप में जाने जाते हैं. प्रशासनिक सेवा से जुड़ने से पूर्व डॉ सिंह आइएसएम धनबाद में प्राध्यापक रहे थे. लगातार शोध कार्य से जुड़े रहना उनका शौक था. उनकी लिखी किताबें और पांडुलिपियां आने वाले दिनों में झारखंड के इतिहास के लिए उपयोगी सिद्ध होंगी.

इसके साथ ही डॉ उरांव ने एक्सआइएसएस को सीएनटीएसपीटी एक्ट की खामियों, एक्ट से आदिवासी समुदाय को हुए लाभ-नुकसान पर शोध करने के लिए प्रेरित किया. वहीं, डॉ महुआ माजी ने ट्राईबल रिसोर्स सेंटर की पहल के लिए एक्सआइएसएस को शुभकामनाएं दी.

कई जनजातीय विषयों पर डॉ सिंह ने की शोध

इस मौके पर डॉ सिंह की पत्नी बिमलेश्वरी देवी सिंह और पुत्र ध्रुव सिंह उपस्थित थे. ध्रुव सिंह ने कहा कि पिता ने अपने शोध कार्य में झारखंड दर्शन को प्राथमिकता दी. उन्होंने रांची के मंदिरों के लिए हरिबाबा आंदोलन, महाभारत, कौटिल्य, श्री बाबू, गरीबी, आदिवासी महिलाएं, ब्यूरोक्रेसी, जंगल और पर्यावरण, झारखंड की कला-संस्कृति, जीवन शैली, हिंदुत्व, पंचायती राज, मुंडा गीत, जातीयता, राजनीतिक अधिकार, जनजातीय विविधता, जमीनी शासन, सपनों में झारखंड, प्राचीन भारत में खनन, औद्योगिक विकास, यूरिया, जंगल सत्याग्रह, लोकसंस्कृति का संरक्षण व जनजातीय आंदोलन जैसे विषयों पर शोध किया. इस दौरान बिरसा मुंडा पर लिखी उनकी पुस्तक और पीपुल ऑफ इंडिया सीरीज लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी.

पुस्तक का किया लोकार्पण

ध्रुव ने बताया कि उनके पिता नागपुरी और उरांव भाषा के जानकार थे. इससे ग्रामीणों से बातचीत करने में आसानी होती थी. फादर बोनेट के करीबी थे. इसलिए एक्सआइएसएस के प्रति उनका लगाव शुरू से था. वहीं, बिमलेश्वरी देवी ने बताया कि डॉ सिंह आदिवासी समाज के बीच काफी समय देते थे. बिमलेश्वरी देवी ने झारखंड के झूमर और डमकच पर आधारित छोटानागपुर के सुरीली लोक गीत के संग्रह पर आधारित पुस्तक का लोकार्पण किया.

No Comments yet!

Your Email address will not be published.