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झारखंड: ECL कोल प्रोजेक्ट से 200 आदिवासी परिवार उजड़ने का खतरा, विरोध में उतरे ग्रामीण

Posted on January 19, 2023 - 11:52 am by

झारखंड के गोड्डा जिले में इस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) की राजमहल-ललमटिया कोल परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन की घेरबंदी के दौरान बेहद तनावपूर्ण स्थिति बन गई. बुधवार को ईसीएल और जिला प्रशासन के अफसरों के साथ सुरक्षा बलों के एक हजार से भी ज्यादा जवान तालझारी गांव पहुंचे तो हजारों की संख्या में ग्रामीण परंपरागत हथियारों, लाठी-डंडो के साथ जमा हो गए. आदिवासी रैयतों का कहना है कि जान देंगे जमीन नहीं, प्रोजेक्ट से 200 परिवारों के उजड़ जाने खतरा है.

कंपनी ने 125 एकड़ जमीन अधिग्रहित की

ईसीएल ने अपनी कोल परियोजना के विस्तार के लिए बीते पांच सालों के दौरान बोआरीजार प्रखंड के तालझारी गांव की 125 एकड़ जमीन अधिग्रहित की है. वर्ष 2018 से ही वहां ईसीएल की ओर से खदान विस्तार की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन तालझारी के रैयतों सहित आसपास के गांवों के कड़े विरोध के कारण अब तक वहां कोयला खनन शुरू नहीं कराया जा सका है.

जमीन के सीमांकन की कोशिश के दौरान अब तक आधा दर्जन से भी अधिक बार ग्रामीणों और प्रशासन के बीच टकराव हो चुका है. छह माह पूर्व तालझारी गांव में बातचीत के लिए गए ईसीएल के सीएमडी को ग्रामीणों ने बंधक भी बना लिया था. बाद में जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से उन्हें ग्रामीणों के चंगुल से सकुशल मुक्त कराया गया था.

ईसीएल कंपनी का दावा

ग्रामीणों का कहना है कि वे जान दे देंगे. लेकिन अपनी जमीन नहीं देंगे. दूसरी तरफ ईसीएल का दावा है कि यहां जिन रैयतों की जमीन अधिग्रहित की गई है. उन्हें अब तक 10 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा दिया गया है. 22 रैयतों को राजमहल परियोजना में नौकरी भी दी गई है. इसके बावजूद परियोजना के विस्तार का विरोध करना ठीक नहीं है.

वहीं बुधवार को ईसीएल की ओर से अधिग्रहित जमीन पर कब्जे के लिए जिला बल के अलावा आईआरबी (इंडियन रिजर्व बटालियन), सीआईएसएफ (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) और रैपिड एक्श फोर्स के एक हजार से ज्यादा जवानों की तैनाती की गई है. ईसीएल की राजमहल परियोजना के जीएम आरसी महापात्रा और महगामा के एसडीओ-एसडीपीओ मौके पर मौजूद हैं.

प्रोजेक्ट शुरु होने पर 200 परिवारों के उजड़ने का खतरा

ईसीएल की राजमहल परियोजना के कोयले से एनटीपीसी के दो पावर प्लांट चलते हैं. कहलगांव और फरक्का प्लांट को अब मांग के अनुरूप ईसीएल कोयला आपूर्ति नहीं कर पा रही है. कहा जा रहा है इसी प्रोजेक्ट से तालझारी में खनन शुरू होने पर राजमहल परियोजना का अस्तित्व बच पाएगा. लेकिन तालझारी के आदिवासी रैयत इस बात पर अड़े हैं कि वे इस जमीन को नहीं देंगे. यहां से उजड़े तो लगभग 200 परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा.

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