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झारखंड: जाहेर थान दुमका में अतिक्रमण, विरोध प्रदर्शन

Posted on December 13, 2022 - 9:15 pm by

दिसोम मांझी थान समिति दुमका के द्वारा 13 दिसम्बर को बैठक की गई. बैठक में मुख्य रूप से दिसोम जाहेर थान दुमका की अतिक्रमण को लेकर की गई.

बैठक में कहा गया कि दिसोम जाहेर थान दुमका में आदिवासी सदियों से इस धार्मिक स्थल पर पूजा करते हुए आए हैं. ऐसी परिस्थिति में असामाजिक तत्वों द्वारा इस धार्मिक स्थल का अतिक्रमण होना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने बताया कि दिसोम जाहेर थान दुमका का इतिहास देश के आजादी से जुड़ा हुआ है. वर्तमान परिपेक्ष में इस धार्मिक स्थल में कई बुद्धिजीवी समाजसेवी का काफी महत्वपूर्ण भूमिका है. सर्वप्रथम देश आजादी के 1947 में पद्मश्री प्राप्त स्वर्गीय चित्तू टूडू (जनसंपर्क विभाग निदेशक ) मुख्य सलाहकार के रूप में एवं प्रथम सांसद स्वर्गीय लाल हेंब्रम मुख्य संरक्षक के रूप में अपना दायित्व को निभाते हुए कार्य किए है.

मांझी बाबा के रूप में पूर्व विधायक पायका मुर्मू एवं पूर्व विधायक दीबू सोरेन (दिसोम गुडित), सांसद पृथ्वी चंद किसकू(जोगमांझी) श्री बरियार हेमरोम (दिसोम परगना) एवं शिबू मुर्मू (पूर्व विधायक) स्वर्गीय कालिदास मुर्मू समिति के सदस्य के रूप में समिति को संचालित करते थे. देश आजादी के उपरांत 1947 से ही सर्वप्रथम इसी स्थान पर दिसोम हरियाड़ पूजा का काफी हर्षोल्लास के साथ आयोजन किया गया. ऐसी परिस्थिति में दिसोम जाहेर थान दुमका का इतिहास बहुत ही धार्मिक एवं ऐतिहासिक है. इसी धार्मिक स्थान में मौजूद बरगद पेड़ के नीचे परगना बाबा थान के पास प्रथम सांसद लाल हेंब्रम ने संथाल परगना महाविद्यालय के निर्माण के लिए विचार विमर्श कर उद्घोषणा की थी. देश आजादी के बाद से अब तक इस धार्मिक स्थल पर सामाजिक गतिविधियां संपन्न होते हुए आई हैं. आज समिति के पदाधिकारी एवं गणमान्य सदस्यों द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी दुमका को भी एक ज्ञापन समर्पित किया गया और समिति ने अनुमंडल पदाधिकारी से अति शीघ्र इस धार्मिक स्थल केंद्र दिसोम जाहेर थान दुमका को असामाजिक तत्वों से मुक्त करने के लिए आवेदन समर्पित किया है. ताकि इस धार्मिक स्थल पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा एवं अनैतिक कार्य नहीं हो सके.

बता दें कि 12 दिसम्बर को बालेश्वर हेम्ब्रम के नेतृत्व अतिक्रमण का विरोध किया गया था.

इस मौके पर दिसोम मांझी श्री बालेश्वर हेंब्रम,मुख्य सलाहकार, अजय हेंब्रम ,मुख्य संरक्षक चंद्रमोहन हांसदा सतीश सोरेन सुभाष चंद्र सोरेन ,आलेश हांसदा सुकलाल सोरेन,अमर मरांडी विनोद मुर्मू फिलिप्स सोरेन,सीमांत हांसदा, प्रेम हांसदा, नायकी बाबा सीताराम सोरेन कैप्टन सोरेन सुधीर मुर्मू बबलू टू डू प्रकाश मरांडी सहित कई गणमान्य पदाधिकारी मौजूद थे.

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