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झारखंड: सरकार से गुहार लगाकर थक गए ग्रामीण, अंधेरे में रहने और डोभा पानी पीने के लिए मजबूर

Posted on January 10, 2023 - 4:05 pm by

झारखंड में दुमका जिले के काठीकुंड प्रखंड स्थित बड़तल्ली पंचायत के खिलौड़ी गांव पहाड़िया और संताल आदिवासी बाहुल्य है. जिसमें करीब 120 घर है. आजादी के 75 वर्ष और झारखण्ड के बनने के 22 वर्ष होने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. इस गांव में चुनेरभुय, बांसकुदरी, प्रधान, देवनागरी नाम का कुल चार मोहल्ले हैं. सभी मोहल्ले करीब आधा से एक किलोमीटर के दूरी में स्थित है.

मरीज खटिया में टांग कर ले जाना पड़ता है

खिलौड़ी गांव में पहुंचने के लिए कोई भी पक्की सड़क नहीं है. यह जरुर है कि कही कही पुलिया और कुछ फिट पीसीसी ढलाई मिल जायेगे. सड़क मार्ग में बड़े-बड़े पत्थर मिलने के कारण ग्रामीणों को चलना बहुत मुश्किल होता है. कई बार यह सड़क दुर्घटना को आमंत्रित करती है. ग्रामीणों का कहना है कि इस कच्ची सड़क में साइकिल तो छोड़िये मोटरसाइकिल भी चलाना मुश्किल है. कच्ची सड़क इतनी ख़राब है कि गांव के सभी टोला में एक मोटर साइकिल में दो व्यक्ति बैठ कर जाना मुश्किल है. ग्रामीणों का कहना है कि पक्की सड़क नहीं होने के कारण हाट बाजार, प्रखंड कार्यालय, स्वास्थ्य केंद्र आदि जाने में बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है. गर्भवती महिलाओ, मरीजों आदि को स्वास्थ्य केंद्र ले जाने में बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है. पक्की सड़क मार्ग नहीं होने के कारण एम्बुलेंस गांव तक नहीं आती है. गर्भवती महिलाओ और मरीजो को स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के लिए करीब दो किलो मीटर दूर खटिया में टांग कर गोपीकांदर प्रखंड के नामोडीह गांव ले जाना पड़ता है. जहाँ से एम्बुलेंस द्वारा स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाया जाता है.

कुछ टोलो में बिजली नहीं, पीना पड़ता है कुआं का पानी, वह भी सूखने वाला है

इस गांव के सभी टोला में अब तक बिजली नहीं पहुचा है. देवनागरी और प्रधान टोला को छोडकर चुनेरभुय और बांसकुदरी टोला में अब तक बिजली नहीं पंहुचा है. बिजली नहीं होने के कारण ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. अधेरा होने के कारण बच्चे शाम को नहो पढ़ पाते हैं. रात में सांप बिच्छु का डर बना रहता है.

पुरे गांव में एक भी चापाकल नहीं है. हालांकि प्रधान टोला में बोरिंग किया गया है, लेकिन वह चालु अवस्था में नहीं है. चारो टोला पीने का पानी के लिय टोला में स्थित कुआँ पर निर्भर करता है. ग्रामीणों का यह भी कहना है कुआं का पानी प्रदूषित है. जिसका पीने से ग्रामीण बीमार भी पड़ते हैं. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि वर्तमान समय में भी कभी-कभी जरुरत पड़ने पर झरना का पानी भी पीने के लिए लाते है. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सिर्फ दो महीने ही कुआँ का पानी पीते है, उसके बाद कुआं सुख जाता है. उसके बाद दस महीना झरना का पानी पीने के लिय मजबूर है. कुछ ही सप्ताह में कुआँ का पानी सुख जायेगा. गांव में स्थित उत्क्रमिक मध्य विधालय, खिलौड़ी में भी कोई चापाकल नही है. जिस कारण बच्चों को पीने का पानी पीने के लिए दिक्कत होती है.

ग्रामीणों के अनुसार वे बिजली, पानी, सड़क का समाधान के लिए जनता दरबार, जनप्रतिनिधि/नेता और बिजली विभाग से गुहार लगा कर थक चुके है. लेकिन जनप्रतिनिधि उनकी सुध ही नहीं ले रहे है. ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि उनके गांव को मुख्य सड़क मार्ग से जाए, बिजली, चापाकल आदि लगाने की मांग की है. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि अगर सरकार प्रशासन जल्द मुलभुत समस्याओं का समाधान नहीं करती है तो ग्रामीण सड़क पर उतर कर आन्दोलन करने के लिय बाध्य हो जायेगे.

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