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झारखंड: लैंड बैंक और भूमि स्वामित्व योजना का क्यों विरोध कर रहे हैं आदिवासी

Posted on November 8, 2022 - 4:52 pm by

खतियान-जमीन बचाओं संघर्ष मोर्चा झारखंड के बैनर तले विभिन्न विभिन्न संगठनों ने राजभवन के सामने धरना दिया. धरने में दयामनी बारला ने कहा कि राज्य बनने के बाद आदिवासी-मूलवासी पर चारों ओर से लगातार हमले हो रहे हैं. केंद्र सरकार ने 2016 में भूमि बैंक बनाया और इसमें 21 लाख से अधिक सामुदायिक जमीन को भूमि बैंक में शामिल कर लिया है. समुदाय के सभी पारंपरिक अधिकारों को तकनीकी रूप से कमजोर किया जा रहा है. इस अवसर पर मांग की गई कि केंद्र सरकार द्वारा कॉरपोरेट घरानों के लिए लायी जा रही स्वामित्व योजना के तहत प्रॉपर्टी कार्ड को लागू नहीं किया जाये. झारखंड में सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, पांचवीं अनुसूची, ग्राम सभा के हक-अधिकार और पेशा कानून सख्ती से लागू हो. प्रोपर्टी कानून बनाने के लिए आदिवासी बहुल खूंटी जिला में ड्रोन से जमीन, संपत्ति का सर्वे स्थायी रूप से रोका जाए. इस कार्यक्रम में 20 से अधिक आधिक आदिवासी संगठन शामिल हुए थे.

इससे पहले 26 अक्टूबर को झारखंड के खूंटी में उपायुक्त कार्यालय के सामने के जदूर अखड़ा में इस योजना के विरोध में सभा हुई थी.

शामिल आदिवासी प्रदर्शनकारी

बता दें कि  इस साल 25 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के बारे में कहा, “हम लोगों को उनके घर और जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड देने में जुटे हैं. ये डिजिटल रिकॉर्ड प्रॉपर्टी पर विवाद कम करने के साथ ही एक्सेस टू क्रेडिट (बैंक लोन) तक लोगों की पहुंच बढ़ा रहा है.”

लेकिन झारखंड में केंद्र सरकार की इस योजना के खिलाफ आदिवासी समाज तेजी से गोलबंद हो रहा है. इस योजना को पंचायती राज मंत्रालय ने पिछले साल पायलट चरण में छह राज्यों में लागू किया था जिनमें से महाराष्ट्र को छोड़ कर सभी बीजेपी शासित राज्य हैं. हालांकि पायलट चरण में लागू होने के बाद इसके खिलाफ किसी तरह का विरोध प्रदर्शन नहीं देखा गया.  दूसरे चरण में जिन 20 राज्यों में इस योजना की शुरुआत होनी है उनमें आदिवासी बहुल राज्य झारखंड और छत्तीसगढ़ शामिल हैं. इसी कड़ी में इस योजना की प्रक्रिया की सुगबुगाहट जैसे ही झारखंड पहुंची आदिवासी व मूलवासियों के बीच इसके विरोध में स्वर फूटने लगे हैं.

भूमि स्वामित्व योजना को लैंड बैंक से जोड़कर देखा जा रहा है. भूमि बैंक में गांव के धार्मिक व सार्वजनिक भूमियों को शामिल किया गया है. इन भूमि में गांव के लोगों का पारंपरिक अधिकार होता है.

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