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केरल: अट्टापदी में एक और नवजात की मौत, आदिवासियों में सिकल सेल एनीमिया एक बड़ी समस्या

Posted on March 13, 2023 - 5:03 pm by

केरल में पलक्कड़ जिले के अट्टापदी में चार दिन के एक नवजात बच्चे की मौत हो गई, अब तक ग्यारहवें बच्चे की मौत हुई है. यह घटना त्रिशूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल की है. अधिकारियों के अनुसार आदिवासी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं से बचने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.

क्या है पूरा मामला

द फेडरल के रिपोर्ट के अनुसार समय से पहले नारायणस्वामी और सुधा को एक पुत्र हुई थी. वे दोनों शोलायुर के वरागमपडी टोले के रहने वाले हैं. पैदा होने के बाद नवजात का वजन केवल 870 ग्राम था.

बता दें कि सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित सुधा को पहले अगाली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया और फिर उसे त्रिशूर मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित कर दिया गया. फिर गर्भावस्था के आठवें महीने में सिजेरियन सेक्शन के जरिए बच्चे को बाहर निकाला गया. नवजात गहन चिकित्सा इकाई में नवजात का इलाज चल रहा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलने पर उसकी मौत हो गई.

समन्वय की कोशिश हो रही है

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि यह कैलेंडर वर्ष में दूसरी और चालू वित्त वर्ष में ग्यारहवीं शिशु मृत्यु है. संपर्क करने पर पलक्कड़ जिला चिकित्सा अधिकारी रीठा केपी ने कहा कि आदिवासी महिलाओं को उनकी गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं से बचने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि हम आदिवासी बस्तियों में गर्भवती महिलाओं की साप्ताहिक समीक्षा करते हैं और गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं से बचने के लिए सभी कदम उठाए जाते हैं. सभी विभाग अब अट्टापदी में शिशु मृत्यु को रोकने के लिए अच्छे समन्वय के साथ काम कर रहे हैं.

हालांकि, कभी-कभी आदिवासी अपने कुछ रीति-रिवाजों के कारण बाहर आने से बचते हैं. स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने कहा कि उनके साथ उनकी भाषा में संवाद करना एक चुनौती है. उन्होंने कहा कि अब जागरूकता निर्माण के लिए आदिवासी समुदाय के सदस्यों को विभाग के संदेश को अपनी भाषा में बताने का प्रयास किया जा रहा है.

सूत्रों ने कहा कि कई मौकों पर 700 ग्राम वजन वाले बच्चों को बचाया गया. लेकिन कभी-कभी सिकल सेल एनीमिया पॉजिटिव माताओं जैसी स्वास्थ्य जटिलताओं के साथ, समय से पहले बच्चों को बचाना वास्तव में मुश्किल हो सकता है.

क्या सिकल सेल एनीमिया

सिकल सेल एनीमिया असामान्य हीमोग्लोबिन के कारण होने वाली रक्त की एक आनुवांशिक बीमारी है. असामान्य हीमोग्लोबिन के कारण लाल रक्त कोशिकाएं सिकल के आकार की हो जाती है. जिसके कारण उनके ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता और रक्त प्रवाह कम हो जाती है. यह बीमारी सबसे अधिक आदिवासियों में देखने को मिल रही है.

स्वास्थ्य मंत्री ने विशेष पैकेज देने का किया था वादा

पिछले साल स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने अट्टापदी का दौरा किया था, जब तीन शिशुओं की मौत की सूचना मिली थी और उन्होंने घोषणा की थी कि आदिवासी बेल्ट के लिए एक विशेष हस्तक्षेप पैकेज तैयार किया जाएगा. मंत्री ने कहा था कि उच्च जोखिम वाले समूहों सहित गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी के लिए सामुदायिक स्वयंसेवकों और आशा कार्यकर्ताओं का उपयोग किया जाएगा.

सरकार ने कुछ दिन पहले कोट्टाथारा में आदिवासी महिलाओं के लिए अम्मा विदू नामक एक प्रसूति अस्पताल खोला है.

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