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केरल: एमसीएच स्टाफ की लापरवाही से आदिवासी बच्चे की मौ’त

Posted on April 1, 2023 - 10:57 am by

हाल ही में कथित तौर पर कुपोषण और उचित चिकित्सा देखभाल की कमी के कारण एक छह महीने के बच्चे की मौ’त हो गई. यह घटना केरल के वायनाड जिले के मनंतवाड़ी की है. जहां के अस्पताल में इलाज के लिए आये आदिवासी परिवार के बच्चे के इलाज के लिए मना कर दिया गया. जिसके बाद बच्चे की मौ’त हो गई. बता दें कि वायनाड में आदिवासी समुदायों के लिए स्वास्थ्य बुनियादी ढ़ांचे और सुविधाओं पर जोर देती है.

यह है पूरा मामला

मनंतवाडी के वेल्लामुंडा में करट्टुकुन्नु आदिवासी कॉलोनी के निवासी बिनीश और लीला 21 मार्च को अपने बच्चे को गंभीर हालत में वायनाड मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गए. बच्चा एनीमिया से भी पीड़ित था. लेकिन डॉक्टर ने अच्छे इलाज से मना कर दिया और वापस घर भेज दिया. जिसके बाद  अगले दिन सुबह शिशु की उसके घर पर मौत हो गई.

बच्चे को शुरू में करट्टुकुन्नु, वेल्लामुंडा के प्राथमिक स्वास्थ्य उप-केंद्र में ले जाया गया. तबीयत खराब होने पर उसे एमसीएच रेफर कर दिया गया था.

हालांकि, बच्चे को शाम तक एंबुलेंस में अस्पताल के हताहत अनुभाग में ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर ने उसकी स्थिति पर बहुत कम ध्यान दिया. प्रारंभिक जांच करने के बाद चिकित्सक ने कहा कि बच्चे के साथ कुछ भी गंभीर नहीं है और माता-पिता से घर पर ही उसका इलाज करने को कहा.

TIE के रिपोर्ट के अनुसार बिनीश ने कहा कि बच्चे को एक अहानिकर बीमारी के लिए मेडिकल कॉलेज लाने के लिए डॉक्टर उन पर चिल्ला रहे थे. डॉक्टर ने मुझसे पूछा कि क्या मैं पागल हूं. हमें यह विश्वास दिलाया गया कि बीमारी गंभीर नहीं है और इसका इलाज घर पर ही किया जा सकता है. लेकिन हमारे बच्चे की अगली सुबह मौत हो गई.

यह भी आरोप है कि बच्चे को अत्यधिक कुपोषण का सामना करना पड़ा और यहां तक कि स्वास्थ्य कर्मियों ने उसकी स्थिति की जांच करने के लिए उसके घर तक जाने से इनकार कर दिया.

जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ दिनेश ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं. जांच में बच्चे की जांच करने वाले डॉक्टर सहित एमसीएच के मेडिकल स्टाफ की चिकित्सकीय लापरवाही सामने आई. डीएमओ ने कहा कि वायनाड एमसीएच के प्रिंसिपल को कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा गया है.

(चित्र का प्रयोग प्रतिकात्मक रूप से किया गया है)

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