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पूर्वोत्तर भारत के आदिवासी त्यौहारों के बारें में जानिए

Posted on January 2, 2023 - 1:02 pm by

नेहा बेदिया

पर्यटन के लिए पूर्वोत्तर भारत हमेशा पसंदीदा जगहों में से एक रहा है. यहां के खूबसूरत प्राकृतिक नजारों और मिलनसार व्यवहार की अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं. लोग लम्बी छुट्टियों में धूमने-फिरने के लिए इसे एक लोकप्रिय विकल्प की सूची में रखते हैं. यहां के मनमोहक वातावरण लोगों को इतना ज्यादा पसंद आता है कि लोग कई बार आने से भी नहीं कतराते.

पूर्वोत्तर भारत ना सिर्फ खूबसूरत नजारों के लिए जाना जाता है. बल्कि यह आकर्षक व रिझावान आदिवासी त्योहारों के लिए भी प्रसिद्ध है. पूर्वोत्तर भारत के पांच आदिवासी त्यौहारों के बारे में बात करेंगे. जो यहां के सांस्कृतिक विरासत के पहचान भी हैं.

नोंगक्रेम नृत्य उत्सव: मेघालय

nongkrem dance

नोंगक्रेम नृत्य उत्सव मेघालय की खासी आदिवासियों की प्रत्येक वर्ष में पांच दिन होने वाला त्यौहार है. इस त्यौहार को खासी पहाड़ियों(Khasi Hills) का सामाजिक केंद्र ‘स्मित’ में मनाया जाता है. इस आदिवासी नृत्य उत्सव के माध्यम से शक्तिशाली देवी ‘कै बली सिंघार’ को सम्मान दिया जाता है. ताकि समुदाय को देवी अच्छी फसल और समृद्धि का आशीर्वाद दे. इसमें पुरुषों द्वारा किए गए नृत्य को “का शद मस्तीह” और महिलाओं द्वारा प्रस्तुत नृत्य को ” का शाद किनती” कहते हैं.

न्योकुम युलो त्योहार: अरुणाचल प्रदेश

nyokum yullo festival/Travel Hippies

न्योकुम युलो त्यौहार अरुणाचल प्रदेश में नीशि आदिवासियों के द्वारा मनाया जाता है. ‘न्योकुम’ दो शब्दों से बना है, जिसमें ‘न्योक’ का अर्थ है ‘भूमि या पृथ्वी’ और ‘कुम’ का अर्थ सामूहिकता या एकजुटता है. इस त्यौहार को मनाना ब्रह्मांड के सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित करने जैसा है. यह लोगों के कल्याण, सुख और समृद्धी के लिए मनाया जाता है. इस त्योहार में जानवरों को बांस से बनी विशेष प्रार्थना संरचना से बलि के लिए बांधा जाता है. जिसे युगंग कहते हैं. इस पूजा में कोई मूर्ति का प्रयोग नहीं होता है.

बैसागु त्योहार: असम

baisagu dance

असम में बोडो जनजाति के सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक बैसागु है. यह त्योहार समुदाय के लिए एक नए साल की शुरुआत का प्रतीक होता है. इस दौरान अनुष्ठानों में देवताओं, पूर्वजों, गायों, कुत्तों, बत्तखों आदि की पूजा की जाती है. समुदाय के सदस्यों द्वारा इस अवसर पर बगरुम्बा नृत्य किया जाता है. जो कला और संस्कृति का एक सुंदर प्रदर्शन होता है.

लोसुंग उत्सव: सिक्किम

losoong festival

लोसुंग त्यौहार सिक्किम में नए साल का प्रतीक है और हर साल दिसंबर के महीने में मनाया जाता है. यह वो समय है जब किसान अपनी फसलों की कटाई का जश्न मनाते हैं. लोसूंग त्योहार लेप्चा और भूटिया जनजाति के प्रमुख त्योहारों में से एक है. इस दौरान मठों में चाम नृत्य किया जाता है और लोग चांग नामक स्थानीय शराब पीते हैं. इस त्योहार की भावना को और बढ़ाने के लिए तीरंदाजी प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है.

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