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जानिए, लघु वनोपज कौन से हैं? कितनी एमएसपी है और वह कौन से राज्यों में मान्य है

Posted on February 23, 2023 - 11:33 am by
संसद में आदिवासी विशेष

विजय उरांव, ट्राइबल खबर के लिए

वन में रहने वाले आदिवासियों की सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन काफी जटिल है. एक अनुमान के अनुसार भारत में लगभग 300 मिलियन आदिवासी और अन्य स्थानीय लोग अपने निर्वाह और आजीविका के लिए वनों पर निर्भर हैं. भारत में 3,000 पौधों की प्रजातियों की अनुमानित विविधता है, जिसमें से एनटीएफपी, जिसे आमतौर पर माइनर फॉरेस्ट प्रोडक्शंस (एमएफपी) के रूप में जाना जाता है.

आदिवासियों की अधिकांश आबादी वन क्षेत्रों में रहती है. माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस पर अपनी आजीविका और आय बनाने के लिए काफी हद तक निर्भर करती है, जो आदिवासी समुदाय के लिए निर्वाह और नकदी आय का एक बड़ा स्रोत भी है. लघु वनोपज भी आदिवासियों के लिए एक प्रमुख भाग भोजन, फल, दवाएं और अन्य उपभोग की वस्तुएं बनाते हैं.

पेसा एक्ट 2006 के तहत आदिवासियों को लघु वनोपज पर स्वामित्व और शासन का अधिकार मिलता है. इसमें बांस ब्रश की लकड़ी, टसर, कोकून, शहद, मोम, लाख और औषधीय पौधे समेत सभी गैर लकड़ी वन उपज शामिल है. इस अधिनियम को नागरिकों के हाशिए पर पड़े सामाजिक-आर्थिक वर्ग की सुरक्षा के लिए और जीवन और आजीविका के अधिकार के साथ पर्यावरण के अधिकार को संतुलित करने के लिए लागू किया गया था. हालांकि, कई समस्याएं लाजिमी हैं. जंगलों पर निर्भर आदिवासी और अन्य स्थानीय लोग अभी भी वंचित और गरीब हैं और निष्पक्ष रिटर्न से वंचित हैं.

जनजातीय कार्य मंत्रालय पीएमजेवीएम योजना के तहत अधिसूचित लघु वनोपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए संबंधित राज्य सरकारों को परिक्रामी निधि उपलब्ध कराती है. असम राज्य सरकार ने इस योजना के तहत अब तक एमएसपी पर 34.79 लाख रूपये की वनोपज की खरीद की है.

लघु वनोपज से संबंधित सवाल असम के नोंगोंग से सांसद प्रद्युत बोर्दोलोई ने जनजातीय कार्य मंत्रालय से पूछा था कि असम में समुदायों के लिए आय के स्त्रोत गैर इमारती वन उत्पाद और लघु वन उत्पाद क्या है? एसएसपी खरीदे गए असम के गैर इमारती संग्रहण का जिलावर ब्यौरा और इसमे निर्भर समुदाय कौन है. इसके अलावा एमएसपी की स्थिति क्या है और इसके संबंध में आजीविका विस्तार के लिए सरकार ने क्या उपाय किए है.

केंद्रीय राज्य जनजातीय कार्य मंत्री रेणुका सिंह सरूता ने बाताया कि लघु वनोपज पर निर्भर आजीविका गतिविधियों के दायरे का विस्तार करने के लिए वन धन विकास केंद्रों में एसएफपी(minor Forest produce) मूल्य निर्धारण किया जाता है. यह मंत्रालय की पीएमजेवीएम योजना के तहत स्वीकृत जनजातीय स्वयं सहायता समुह (एसएचजी) है.

पूर्वोत्तर राज्यों में मान्य वनोत्पाद

लघु वनोपज में केंद्र सरकार ने 87 वनोत्पाद को शामिल किया है. इसमें पूर्वोत्तर राज्यों के वनोपज के नाम और दी जा रही एमएसपी में प्रति किलों के दर से बीटल नट कच्चा (30/kg), सुपारी सूखी(200/kg), मशरूम (सूखा)(300), काला चावल(100), जोहर राइस(50), मोटी(किंग) मिर्च (300), सरसों (40), कच्चा काजू(450), काजू (800), अदरक सूखा(50), पेरिला (140), रोज़ेला(200), अखरोट(150), जैंथोक्सिलम सूखे(200), जैक फल बीज (45), हाथी सेब सूखा(डिलनिया इंडिका)(120), बम्बू शूट(70), गम्हार (सूखी छाल)(20), ओरोक्सिलम इंडिकम(सूखी छाल)(40), जंगली मशरूम सूखा (अगारीकस्सप)(400) आदि शामिल है.

देशभर में मान्य वनोत्पाद

वहीं देशभर के लिए मान्य लघु वनोपज और दी जा रही एमएसपी प्रति किलो के दर से इमली (बीज सहित)(36/kg), जंगली शहद(225/kg), गोंद कराया(114), करंज के बीज(20), महुआ के बीज(29), साल के पत्ते(35), बीज सहित चिरौंजी की फली(126), हरीतिका(15), रंगिनी लाख(200), कुसुमी लाख(275), कुसुम के बीज(23), नीम के बीज(27), पुआद के बीज(16) शामिल हैं.

वहीं बहेड़ा(17/kg), पहाड़ी झाड़ू(50/kg), सूखी शिकाकायी की फली(50), बायल गूदा(30), नागरमोथा(30), शतावरी की जड़(107), गुडमार या मधुनाशिनी(41), कालमेघ(35), ईमली(बीज रहित)(63), गुग्गुल(812), महुआ के फूल(सूखा)(30), तेजपत्ता (सूखा), जामुन के सूखे बीज(42), आमले का सूखा गूदा(बीज रहित)(52), भिलांवा(9), रीठा सूखा(14), भाव बीज(13), अर्जुन छाल(21), कोकम सूखा(29), गिलोय(40), कौंच के बीज(21), वायबिडिंग(सूखा बीज), धवाईफूल सूखा फूल(37), नक्स वोमिका(42), वन तुलसी के पत्ते (सूखे)(22) शामिल हैं.

इसके अलावा क्षीरनी(35/kg), बकुल (सूखी छाल), कुटज(सूकी छाल)(31), नोनी(17), सोनापाठा(21), चनोथी के बीज(45), कालिहारी(सूखे कंद)(31), मकोय(सूखे फल)(24), अपंग पौधा(28), सुगंधमंत्री की जड़े(38), वन तुलसी के बीज(16), वन जीरा(70), इमली के बीज(11), बांस झाड़ू(60), सूखा अनोला(60), कचरी बहेड़ा(20), कचरी हर्र(23), बीज लाख(677), मालकांगनी बीज (100), नागोड(20), गोखरू(60), पिपला(120) और श्रृंगराज(18) शामिल है.

विशेष राज्यों में मान्य वनोत्पाद

इसके अलावा झारखंड के लिए टसर कोकून (क्रिसालिस) को रीलिंग क्लास ग्रेड में 1.55 ग्राम से अधिक वजन को 3200 रूपये प्रति हजार संख्या में और अन रिलिंग ग्रेड में 1.44 ग्राम से अधिक वजन को 1500 रूपये प्रति हजार संख्या में है. ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और पश्चिम बंगाल में माहुल की पत्तियों के लिए 15 प्रति किलो एमएसपी है. तथा कर्नाटक के लिए ट्री मॉस (बायोफाइट्स) 350 रू प्रति किलोग्राम में एमएसपी दी जाती है.

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