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जानिए, सरकार ने माओवाद क्षेत्रों में आदिवासियों के लिए रोजगार के क्या इंतेजाम किए हैं?

Posted on October 18, 2022 - 11:21 am by

विजय उरांव

माओवाद क्षेत्र में आदिवासियों के रोजगार के अवसर के संबंध में अराकोनम सांसद (DMK) एस. जगतरक्षकण ने सवाल किया था. केंद्रिय जनजातीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह ने चलाए जा रहे कार्यक्रम के संबंध में बताया था. कि जनजातीय कार्य मंत्रालय अपनी योजनाओं के तहत अन्य बातों के साथ-साथ, कौशल विकास और रोजगार सह आय सृजन गतिविधियों को कवर करते हुए, राज्यों में जनजातियों के आर्थिक विकास के लिए राज्य योजना में परिवर्धक के रूप में निधि उपलब्ध कराता है.

पिछले तीन वर्षों में जनजातीय उप-योजना को विशेष केंद्रीय सहायता, विशेष रूप से कमजोर जनजातियों का विकास और संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत अनुदान योजनाओं के तहत 2018-19 में 181498.70, 2019-20 में 266140.83, 2020-21 में 79969.55 रूपये जारी किए, वहीं जनजातीय कार्य मंत्रालय भारतीय सहकारी विपणन विकास संघ के माध्यम से वन धन विकास चल रहे कार्यक्रम में वन धन का उपयोग करके जनजातीयों के लिए रोजगार बनाए जा रहे है. आजीविका और रोजगार सृजन संबंधी योजना में कृषि, पशुपालन, वाणिज्य विभाग, मछली पालन, भूमि संसाधन विकास विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, वस्त्र मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय समेत 17 योजना के क्षेत्र शामिल हैं.

ट्राईफेड के माध्यम से वनोपज पर रोजगार

जनजातीय कार्य मंत्रालय भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (ट्राईफेड) के माध्यम से वन धन विकास कार्यक्रम भी चला रहा है, जो वन संपदा यानि वन धन का उपयोग करके आदिवासियों के लिए रोजगार सृजन को लक्षित करता है. इसके तहत आदिवासी समुदाय के स्वामित्व वाले लघु वन उत्पाद केंद्रित बहुउद्देश्यीय वन धन विकास केंद्र जनजातीय आबादी वाले क्षेत्रों में स्थापित किए गए हैं. केंद्र स्थानीय रूप में उपलब्ध लघु वनोपज की खरीद सह मूल्यवर्धन के लिए सामान्य सुविधा केंद्रों के रूप में कार्य करते हैं. कच्चे उत्पाद के वैल्यु बढ़ने से मूल्य में भी काफी वृद्धि होने की उम्मीद है और इसके परिणामस्वरूप संग्रहकर्ताओं की आय में वृद्धि होगी.

जनजातीय समुदाय के स्वामित्व वाले लघु वन उत्पाद केंद्रित बहुउद्देशीय वन धन विकास केन्द्र महत्वपुर्ण जनजातीय आबादी वाले क्षेत्रों में स्थापित किए गए है। इसके लाभार्थियों के साथ पिछले तीन वर्षों के दौरान स्वीकृत केंद्रिय बहुउद्देशीय वन धन विकास केंद्र की संख्या पुरे भारत में 2019-20 में 1126, 2020-21 में 1098 तथा 2021-22 में 886 है.

इसके अलावा राष्ट्रीय अनुसूचित वित विकास निगम द्वारा आय सृजन के गतिविधियों को शुरू करने के लिए सावधि ऋण योजना में एनएसटीएफडीसी 50 लाख प्रति ईकाई तक की लागत परियोजनाओं के लिए प्रदान करता है, परियोजना के 90 फीसदी तक वितीय सहायता प्रदान करता है, शेष राशि सब्सिडी के माध्यम से पुरी की जाती है. जनजातीय महिला सशक्तिकरण योजना में 2 लाख तक की लागत वाली परियोजना की लागत के लिए ऋण 90 फीसदी दी जाती है, तथा वित्तीय सहायता के रूप में 4 प्रतिशत प्रतिवर्ष अत्यधिक रियायती ब्याज दजर पर दी जाती है. स्वयं सहायता समुहों के लिए सूक्ष्म ऋण योजना इस योजना में प्रति सदस्य को 50 हजार तथा  अधिकतम 5 लाख तक SHG को ऋण प्रदान की जाती है, जनजातीय शिखा ऋण योजना के तहत पीएचडी सहित पेशेवर और तकनीकी पढ़ाई के लिए पात्र अनुसूचित जनजातियों को दी जाती है।

मोबाईल, रोड कनेक्टिविटी और शिक्षा, कौशल विकास

इसके अलावा गृह मंत्रालय के सुचना के अनुसार 2015 से स्वीकृत वामपंथी उग्रवाद का समाधान करने के लिए राष्ट्रीय नीति कार्य योजना तैयार की गई थी, जिसमें सड़क और दूरसंचार कनेक्टिविटी, वितीय समावेश, कौशल विकास, शिक्षा आदि में सुधार के लिए वामपंथी उग्रवाद क्षेत्रों में योजनाएं लागु की गई है, ऐसी योजनाएं स्थानीय स्तर पर रोजगार उत्पन्न करती है। उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में 10,293 किलोमीटर रोड से अधिक, चरण 1 में 2343 मोबाईल टावर तथा मोबाईल कनेक्टिविटी के लिए चरण 2 में 2542 टावरों को मंजूरी दी गई, विशेष केंद्रीय सहायता के तहत  2017 में सबसे अधिक वामपंथी जिलों 3078.24 करोड़ जारी किए गए।  तथा

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के द्वारा 47 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और 68 कौशल विकास केंद्रों (एसडीसी) को “वामपंथी  उग्रवाद से प्रभावित जिलों में कौशल विकास योजना” याजना के तहत 407.85 करोड़ की। जनजातीय उद्यमियों के लिए इस मंत्रालय ने उद्यम पूंजी कोष की शुरूआत भी की है। सरकार केंद्रीय मंत्रालयों की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से दूरस्थ, माओवादी ग्रस्त क्षेत्रों में जनजातियों सहित देश भर में अनुसूचित जनजाति आबादी के बीच बेरोजगारी की स्थिति को सुधारने के लिए एक एकीकृत दृष्टीकोण अपना रही है।

PVTGs के लिए निधि

विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समुहों के विकास के लिए सभी राज्यों को 2018-19 में 25 हजार लाख, 2019-20 में 24999 लाख, 2020-21 में 14 हजार लाख प्रदान किए गए हैं. टीएसएस को एससीए के तहत राज्यों को 2018-19 में 134500 लाख, 2019-20 में 134562 लाख, 2020-21 में 79499 लाख रूपये केंद्र की ओर से प्रदान किया गया है.

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