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जानिए गोंड कला क्या है और इसकी खास बात क्या है?

Posted on December 14, 2022 - 5:26 pm by

गोंड कला अपने नाम से ही पता चल रहा है कि यह गोंड आदिवासियों के द्वारा बनायी जाने वाली कला है. इस कला पैटर्न की बनी कलाकृति को कोई भी इंसान देखें. तो अवश्य ही उसे बेहद आकर्षक लगेगा. जीवंत रंगों के प्रयोग से बनाई गई यह कलाकृति किसी भी व्यक्ति को उसके पहले दृश्य में ही लुभाने की क्षमता रखती है.

गोंड जनजाति का सांस्कृतिक संपदा

गोंड कला मुख्यत: मध्यप्रदेश राज्य के गोंड जनजातियों द्वारा बनाया जाता है.  जो भारत की दूसरी सबसे बड़े आदिवासी समुदाय है. इसके अलावा इस कला को आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के कुछ हिस्सों में भी इस कला का प्रयोग किया जाता है. यह गोंड जनजातियों का सांस्कृतिक संपदा भी है.

मधुबनी से मिलता-जुलता पर है भिन्न

इस कला को अक्सर लोग मधुबनी कला समझ लेते हैं. हालांकि गौर करने पर इस कला की भिन्नता सामने आने लगती हैं. गोंड कला में दो मुख्य पैटर्न- लकीरों और बिंदुओं को एक सफल आकार देने के लिए प्रयोग किया जाता है. इसके साथ जीवंत रंगों- नारंगी, लाल, पीला और नीले रंग का प्रयोग किया जाता है, जिससे बनाई गई आकृतियां बहुत आकर्षक लगते हैं.

प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल से बनता है

कलाकृति के दौरान उपयोग में लाए जाने वाले रंग प्राकृतिक होते हैं. इन रंगों को मूल रूप से फूल, मिट्टी आदि से लिया जाता है. गोंड कला को बनाने के लिए जिस प्रकार प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है, उसी प्रकार कलाकृतियों में भी प्राकृतिक चीजों को ही मुख्यता दर्शाया जाता है. जैसे तितली, हाथी, पेड़, पौधे, मछली, शेर, मोर आदि प्रकृति से संबंधी चीजें शामिल हैं.

भारत के साथ विदेशों में भी है पहचान

गोंड कला को शुरुआत में मिट्टी के दीवारों में बनाया जाता था. लेकिन इस कला की लोकप्रियता और संरक्षण के कारण इसे कैनवस, पेपर और पक्के दीवारों में भी अभ्यास किया जाने लगा है. इस कला ने ना केवल भारत के लोगों को अपनी ओर ध्यान केंद्रित किया है, बल्कि फ्रांस, यूके और यूएस ने भी इसे बेहद मनमोहक समझा है.

गोंड पेंटिग में पेड़ों का है विषेश महत्व

इस कला में बनाए जाने वाले पेड़ों का विषेश महत्व है. पेड़ों से जुड़ी कई रोचक कथाएं भी मौजूद हैं. खास कर पीपल के पेड़ को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि गोंड जनजातियों का मानना है कि पीपल के पेड़ पर देवताओं का वास होता है.

गोंड जनजातियों का यह भी मान्यता है कि घरों की दीवारों पर गोंड कला के होने से बुरी शक्तियों के प्रभाव से बचाया जाता है. इसलिए लोग अपने घरों की दीवारों पर ऐसी सुंदर प्राकृतिक आकृतियों को बनाते हैं.

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