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जानिये मणिपुर में आदिवासियों के विकास के लिए केंद्र सरकार क्या कर रही है?

Posted on October 20, 2022 - 11:25 am by

विजय उरांव, ट्राइबल खबर के लिए

नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों को लेकर मोदी सरकार का दावा है कि वह पूर्व की सभी सरकारों से गंभीर है. यह देखने में भी आ रहा है कि पूर्वोत्तर भारत के विकास पर वर्तमान सरकार का जोर रहा है. बीते संसदीय सत्र के दौरान मणिपुर के जनजातीय समुदाय में साक्षरता दर बढ़ाने के लिए क्या योजना है, इसको लेकर सवाल उठाए गए.

आउटर मणिपुर के सांसद (नागा पीपल्स फ्रंट) लोरहो फोज ने सवाल किया कि मणिपुर में जनजातीय समुदाय में साक्षरता दर बढ़े, इसके लिए केंद्र सरकार क्या कर रही है. इस सवाल के जवाब में अनुसूजित जनजातीय मामलों की केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह सरूता ने लोक सभा में जवाब देते हुए कहा कि, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और बजट घोषणा 2021-22 के साथ उचित प्रौढ़ शिक्षा के लिए नवभारत साक्षरता कार्यक्रम को मंजूरी दी गई है. यह योजना वित्त वर्ष 2022-27 की अवधि के लिए है. योजना का उद्देश्य आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता प्रदान करना है. साथ ही अन्य विषयों को भी शामिल करना है, जो 21वीं सदी के नागरिकों के लिए आवश्यक है.

मंत्रालय इसके साथ जनजातियों का साक्षरता दर बढ़ाने के उद्देश्य वाली योजनाओं के साथ शैक्षिक विकास के लिए विभिन्न योजनाओं को लागू करेगी. इन योजनाओं में एकलव्य आदर्श आवासीय योजना, मैट्रिक से पहले और मैट्रिक के बाद छात्रवृति, उच्च श्रेणी शिक्षा की छात्रवृति, फेलोशिप, नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप जैसी योजनाओं को शामिल किया गया है.

इसके अलावा राज्यों/गैर-सरकारी संगठनो को संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत अनुदान योजना के अनुसार शिक्षा संबंधी गतिविधियों के लिए आर्थिक मदद दी जाएंगी. साथ ही पीवीटीजी के विकास और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए काम कर रहे एनजीओ को भी अनुदान दिया जा रहा है.

प्रमुख योजनाएं, जिनका जिक्र केंद्रीय मंत्री ने किया

एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय – वर्ष 1997-98 में आवासीय विद्यालयों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में आदिवासी छात्रों (कक्षा 6 से 12) को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए किया गया था. मंत्रालय की ओर से 684 स्कूलों को मंजूरी दी गई है. जिनमें से 378 शुरू हो चुके हैं.


उच्च शिक्षा के लिए फेलोशिप और स्कॉलरशिप – यह योजना विश्वविद्यालयों में एम.फिल और पीएचडी करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है. इसके अलावा शीर्ष 246 संस्थानों जैसे आईआईटी/एम्स आदि में ग्रैजुएशन और पोस्ट-ग्रैजुएशन की पढ़ाई के लिए सहायता प्रदान करती है.


विदेश में अध्ययन के लिए आदिवासी के छात्रों को नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप – विदेश में उच्च शिक्षा अध्ययन करने के लिए हर साल 20 आदिवासी छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है.


मैट्रिक पूर्व छात्रवृत्ति – यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसके तहत कक्षा 9वीं तथा दसवीं में पढ़ने वाले अ.ज.जा के छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है.


मैट्रिक के बाद छात्रवृत्ति – इसके तहत 10वीं कक्षा से आगे पढ़ने वाले अ.ज.जा. छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है.
• संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत अनुदान
• विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों का विकास
• अ.ज.जा के कल्याण के लिए काम कर रहे स्वैच्छिक संगठनों को सहायता

मणिपुर सरकार के अनुसार शिक्षा स्तर को बढ़ाने के लिए किए जा रहे कार्य
• राज्य में सेनापति, नोनी, चंदेल और तामेंगलोंग के जनजातीय बहुल जिलों में 5 आश्रम विद्यालय चल रहे हैं.
• मणिपुर के पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों में आदिवासी लड़के और लड़कियों के लिए 22 छात्रावास स्थापित किए जा रहे हैं.
• मणिपुर के 6 जनजातीय जिलों में स्वायत्त जिला परिषदों के तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय भी कार्य कर रहे है. ये जिलें तामेंगलोंग, उखरूल, चंदेल, सेनापति, चुराचांदपुर और कांगपोकपी है.
• मणिपुर सरकार यहां के पहाड़ी जिलों में 528 प्राथमिक विद्यालय, 173 उच्च प्राथमिक विद्यालय और 23 माध्यमिक और उच्च विद्यालय चला रही है. जिसमें प्राथमिक/उच्च प्राथमिक कक्षाएं है.
• अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक समुदायों के स्कूल जाने वाले बच्चों की साक्षरता दरों और शैक्षणिक स्तर बढ़ाने के लिए स्कूल खोले गए हैं. जिसमें कस्तूरबा विद्यालय और आवासीय विद्यालय (नेताजी सुभाष चंद्र आवासीय विद्यालय) जैसी योजनाएं शामिल हैं.

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