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जानिए क्यों आदिवासी कर रहे हैं लोकसभा चुनाव का बहिष्कार

Posted on March 23, 2024 - 12:30 pm by
जानिए क्यों आदिवासी कर रहे हैं लोकसभा चुनाव का बहिष्कार

लोकसभा चुनाव के पूर्व ही चुनाव के बहिष्कार की खबरें आने लगी हैं. मामला नागालैंड से जुड़ा हुआ है. नागालैंड के ‘पूर्वी नागालैंड विधायक संघ’ ने नागालैंड में सभी जनजातीय निकायों को चुनाव संबंधी गतिविधियों में भाग न लेने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही संघ ने पूर्वी नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ईएनपीओ) से फ्रंटियर नागालैंड क्षेत्र के व्यापक हित के लिए चल रहे ‘सार्वजनिक आपातकाल’ को निलंबित करने की अपील की है.

पूर्वी नागालैंड सार्वजनिक आपातकाल द्वारा जारी एक अधिसूचना में आदिवासी निकायों को 28 मार्च को प्रस्तावित पूर्वी नागालैंड सार्वजनिक बैठक तक किसी भी सरकारी उद्घाटन समारोह में भाग नहीं लेने के लिए कहा गया है. संघ ने कहा, जनजातीय निकाय किसी भी चुनाव संबंधी गतिविधियों जैसे कि विभिन्न राजनीतिक दलों के मतदान एजेंटों की नियुक्ति, किसी भी चुनाव संबंधी प्रशिक्षण आदि में भाग न लें.

इसकी जानकारी संघ नेअधिसूचना जारी करते हुए दी. अधिसूचना नागालैंड में सार्वजनिक आपातकाल और उसके बाद किसी भी केंद्रीय और राज्य चुनाव में भाग नहीं लेने और भारत सरकार के गठन के प्रस्ताव को पूरा न करने के खिलाफ वोट डालने से परहेज करने के सार्वजनिक संकल्प को देखते हुए जारी किया गया है.

5 मार्च को ईएनपीओ ने पूर्वी नागालैंड के जनजातीय निकायों के साथ, पूर्वी नागालैंड में एक सार्वजनिक आपातकाल की घोषणा की थी. यह आपातकालीन घोषणा केंद्र द्वारा फ्रंटियर नागालैंड क्षेत्र के निर्माण के प्रस्ताव को निपटाने में देरी के खिलाफ थी. जिसमें पूर्वी नागालैंड के मोन, तुएनसांग, किफिरे, लोंगलेंग, शमतोर और नोक्लाक जिले शामिल थे.

इस बीच, ईएनपीओ के निर्देशानुसार, आदिवासी निकायों के स्वयंसेवकों ने देरी के खिलाफ नाराजगी के संकेत के रूप में गुरुवार को पूर्वी नागालैंड के सभी छह जिलों में घरों और कार्यालयों के ऊपर काले झंडे लगाए. हालांकि कार्यालय, व्यापारिक प्रतिष्ठान और स्कूल खुले हैं, ईएनपीओ ने कहा कि सार्वजनिक आपातकाल जारी रहेगा और पूर्वी नागालैंड में काले झंडे फहराए जाते रहेंगे.

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