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मन की बात: आदिवासी समाज से प्रकृति और पर्यावरण के बारें में सीखें: मोदी

Posted on October 30, 2022 - 7:11 pm by

भगवान बिरसा मुंडा ने अपने छोटे से जीवन काल में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लाखों लोगों को एकजुट कर दिया था. उन्होंने भारत की आजादी और आदिवासी संस्कृति की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया था. ऐसा कितना कुछ है, जो हम धरती आबा बिरसा मुंडा से सीख सकते हैं. जब धरती आबा बिरसा मुंडा की बात आती है, छोटे से उनके जीवन काल की तरफ़ नज़र करते हैं, आज भी हम उसमें से बहुत कुछ सीख सकते हैं और धरती आबा ने तो कहा था- यह धरती हमारी है, हम इसके रक्षक हैं. उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अक्टूबर को मन की बात कार्यक्रम में कही.

पीएम मोदी ने आगे कहा कि उनके इस वाक्य में मातृभूमि के लिए कर्तव्य भावना है. पर्यावरण के लिए हमारे कर्तव्यों का अहसास भी है. उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया था कि हमें हमारी आदिवासी संस्कृति को भूलना नहीं है. उससे रत्ती-भर भी दूर नहीं जाना है. आज भी हम देश के आदिवासी समाजों से प्रकृति और पर्यावरण को लेकर बहुत कुछ सीख सकते हैं.

प्रधानमंत्री ने धरती आबा बिरसा मुंडा का जिक्र करते हुए कहा कि नवम्बर महीने में 15 तारीख को हमारा देश जन-जातीय गौरव दिवस मनाएगा. देश ने पिछले साल भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयन्ती के दिन आदिवासी विरासत और गौरव को सेलिब्रेट करने के लिए ये शुरुआत की थी.

पीएम मोदी ने आगे कहा कि पिछले साल भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर मुझे रांची के भगवान बिरसा मुंडा म्यूजियम के उद्घाटन का सौभाग्य प्राप्त हुआ था. मैं युवाओं से आग्रह करना चाहूँगा कि उन्हें जब भी समय मिले. वे इसे देखने जरुर जाएँ. 

पीएम मोदी ने मानगढ़ में होने वाले रैली का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम और हमारी समृद्ध आदिवासी विरासत में मानगढ़ का बहुत ही विशिष्ट स्थान रहा है. यहाँ पर नवम्बर 1913 में एक भयानक नरसंहार हुआ था. जिसमें अंग्रेजों ने स्थानीय आदिवासियों की निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी थी. बताया जाता है कि इस नरसंहार में एक हजार से अधिक आदिवासियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. इस जनजातीय आन्दोलन का नेतृत्व गोविन्द गुरु जी ने किया था. जिनका जीवन हर किसी को प्रेरित करने वाला है

पीएम ने आगे कहा कि  मैं उन सभी आदिवासी शहीदों और गोविन्द गुरु जी के अदम्य साहस और शौर्य को नमन करता हूँ. हम इस अमृतकाल में भगवान बिरसा मुंडा, गोविन्द गुरु और अन्य स्वातंत्र सेनानियों के आदर्शों का जितनी निष्ठा से पालन करेंगे. हमारा देश उतनी ही ऊँचाइयों को छू लेगा.

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