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देश की बाकी आबादी से कम क्यों जीते है आदिवासी ?

Posted on September 28, 2022 - 7:00 am by
low life expectancy of indian tribe

विजय उरांव

  • सामान्य जनसंख्या की जीवन प्रत्याशा 67 वर्ष है
  • सरकार ने आदिवासियों के औसत आयु बढ़ाने के लिए कई कदम उठाये है

भारत में आदिवासियों की आबादी कुल आबादी की  8 फीसदी है, जिसमें 700 से अधिक आदिवासी समुदाय है। आदिवासी समुदायों की जीवन प्रत्याशा सामान्य जनसंख्या से कम है। कम आयु के कारणों में विभिन्न स्वास्थ्य और पोषण संकेतक, शिक्षा स्तर, गरीबी स्तर, अनुसूचित जनजाति और गैर-अनुसूचित जनजाति के बीच में अंतर, पारंपरिक जीवन शैली, आवासों की प्रथकता और फैली हुई आबादी शामिल है। 2019 में आदिवासियों की कम जीवन प्रत्याशा को लेकर जलंधर से लोकसभा सांसद (कांग्रेस) संतोख सिंह चौधरी ने जनजातीय कार्यमंत्रालय से प्रश्न संख्या AU3633 में अनुसूचित जनजाति की कम जीवन अवधि और औसत आयु बढ़ाने को लेकर किए गए उपाय को लेकर किया था जिसमें सरकार ने माना कि आदिवासियों की उम्र सामान्य जनसंख्या से कम है।

जनजातीय स्वास्थ्य विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज, मुंबई ने भारत में अनुसूचित जनजातियों और गैर-अनुसूचित जनजातीय जनसंख्या की जीवन प्रत्याशा को अप्रत्यक्ष तरीकों से अनुमान लगाने के लिए राष्ट्रीय जनगणना 2011 के आंकड़ों का विश्लेषण किया है । 2016 में लैंसेट में प्रकाशित इन अनुमानों से पता चलता है कि भारत में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या की जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 63.9 वर्ष है, जबकि सामान्य जनसंख्या की जीवन प्रत्याशा 67 वर्ष है।

सरकार ने आदिवासियों की औसत आयु बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 30 मिनट की दूरी के अंदर जनजातीय क्षेत्रों में उप-स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना केन्द्रों की स्थापना के लिए देखभाल समय संबंधी मानदंड तथा जनजातीय क्षेत्रों के लिए मोबाइल चिकित्सा ईकाईयों के लिए रियायती मानदंड, जनसंख्या के घर तक स्वास्थ्य देखभाल सुपुर्दगी लाने के लिए मैदानी क्षेत्रों में प्रतिदिन 60 मरीजों की तुलना में 30 मरीजों से ज्यादा एक एमएमयु सहित जन स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थापना, सभी जनजातीय जिलों में जिनका समग्र स्वास्थ्य सूचकांक राज्य औसत से कम है, को उच्च प्राथमिकता वाले जिलों(एचपीडी) के रूप में पहचाना गया है। 256 चिंहित नए एचपीडी में से 101 जनजातीय जिले है। बजट घोषना 2017-18 के अनुसार, 1.5 लाख स्वास्थ्य उप-केंद्र व्यापक प्राथमिक देखभाल प्रावधान के लिए स्वास्थ्य और केंद्र में तब्दीली की जा रही है। आयुष्मान भारत – स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र(एबी-एचडब्ल्यूसी) का उद्देश्य, टीकाकरण और संचारी रोग सहित मातृभूमि और बाल स्वास्थ्य के लिए प्रदान की जाती है। 52,744 एबी-एचडब्ल्यूसी को सरकार द्वारा मंजूरी दी गई है व इसमें से अधिक का संचालन शुरू हो चुका है।

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