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छत्तीसगढ़: केंद्र को भेजा पत्र, लेकिन राज्य सरकार ने स्वयं भूमि डायवर्सन रद्द नहीं किया

Posted on March 15, 2023 - 4:18 pm by

पिछले वर्ष हसदेव अरण्य में कोल ब्लॉक के विरोध के बीच सीएम भूपेश बघेल ने तीन प्रस्तावित कोयला खदानों पर रोक लगाने की बात कही थी. जनभावनाओं को देखते हुए हसदेव अरण्य क्षेत्र के परसा कोल ब्लॉक (हरिहरपुर – फतेहपुर), केते एक्सटेंशन, पेंडरखी कॉल ब्लॉक को अनुमति नही देने की बात कही थी. जिसमें प्रस्तावित तीन कोल खदानो के क्षेत्र से पेड़ो की कटाई भी बंद करने की बात कही थी.

लेकिन सच्चाई इसके उलट है, इसको लेकर जब छत्तीसगढ़ विधानसभा में सवाल उठाये गए तो जो जानकारी सामने आयी, वो चौकाने वाले है. छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासियों को ठगते नजर आ रही है. छत्तीसगढ़ सरकार ने परसा भूमि और पीईकेबी फेज-2 की वन भूमि डायवर्सन रद्द ही नहीं की है.

छत्तीसगढ़ विधानसभा में हसदेव जंगल पर सवाल जवाब

छत्तीसगढ़ विधानसभा में लोरमी विधायक धर्मजीत सिंह ने छत्तीसगढ़ सरकार से सवाल किया था कि क्या राज्य सरकार ने 26 जुलाई 2022 को विधानसभा में पास सर्वसम्मत संकल्प हसदेव क्षेत्र के समस्त कोल ब्लॉक रद्द किए जाने अनुरूप कार्यवाही की है. इसके अलावा उन्होंने पूछा कि क्या 5 अप्रैल 2022 को जारी पीईकेबी ब्लॉक फेज-2 की वन भूमि डायवर्सन अनुमति रद्द कर दी है?

छत्तीसगढ़ विधानसभा का प्रश्नोत्तर

जवाब चौकाने वाले हैं एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार को भूमि डायवर्सन रद्द करने के लिए पत्र भेजा है, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने स्वयं भूमि डायवर्सन रद्द नहीं किया है.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, “छत्तीसगढ़ विधानसभा में सर्वसम्मति से से स्वीकृत संकल्प हसदेव क्षेत्र के सभी कोल ब्लॉक को रद्द करने के लिए राज्य सरकार ने केंद्रीय कोयला मंत्रालय को पत्र भेजा है.”

भूपेश बघेल ने कहा, “परसा वन भूमि डायवर्सन की अनुमति और पीईकेबी ब्लॉक फेज-2 की वन भूमि डायवर्सन अनुमति रद्द नहीं की है.”

हसदेव जंगल की स्थिति

हसदेव का जंगल मध्यप्रदेश के कान्हा क्षेत्र से लेकर झारखंड के जंगलों तक जुड़ा हुआ है. यह छत्तीसगढ़ के 184 कोल खदानों में से 23 हसदेव के जंगलो में है. यह जंगल मौसम परिवर्तन में अहम रोल अदा करता है। 1,70,000 हेक्टेयर में फैले हसदेव अरण्य में गोंड, लोहार, उरांव जैसी कई आदिवासी समुदाय हजारों की संख्या में है.

जून 2011 में, पर्यावरण मंत्रालय की वन सलाहकार समिति ने वन भूमि को खनन के लिए बदलने के खिलाफ सिफारिश की. तत्कालीन पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने इस फैसले को खारिज करते हुए कहा था कि घने जंगलों से दूर क्षेत्र में कोयला खनन किया जाएगा.

वर्ष 2012 के पहले चरण में PEKB कोयला खदानों में खनन के लिए वन व पर्यावरण मंत्रालय द्वारा वन संबंधी मंजूरी दी गई थी. इसमें खनन को 762 हेक्टेयर तक सीमित किया गया था और 137 मिलियन टन का भंडार था.

मार्च 2022 में छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा कि उसने राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम को पीईकेबी कोयला ब्लॉक के दूसरे चरण के तहत 1,136 हेक्टेयर क्षेत्र में कोयला खनन की अनुमति दी है.

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