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लोकसभा चुनाव: जानिए नेशनल कॉन्फ्रेंस ने किस प्रमुख आदिवासी नेता को दिया टिकट

Posted on April 2, 2024 - 11:14 am by
लोकसभा चुनाव: जानिए नेशनल कॉन्फ्रेंस ने किस प्रमुख आदिवासी नेता को दिया टिकट

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने प्रमुख आदिवासी नेता मियां अल्ताफ का नाम अनंतनाग-पुंछ-राजौरी लोकसभा सीट के लिए उम्मीदवार के रूप में घोषित किया. मियां अल्ताफ बकरवाल और पहाड़ी समुदायों के बीच आदिवासी नेता के रूप में जाने जाते हैं. जो अनंतनाग-पुंछ-राजौरी लोकसभा सीट से आगामी 7 मई को होने वाले चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की और से लड़ेंगे.

आदिवासी नेता मियां अल्ताफ पांच बार विधायक रह चुके हैं. साथ ही फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला सरकार में पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने उनके नाम की घोषणा करते हुए कहा, “अनंतनाग-पुंछ-राजौरी सीट के लिए मियां अल्ताफ से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता.

उन्होंने आगे कहा, मियां अल्ताफ ने कभी भी धार्मिक आधार पर वोट नहीं मांगा और हमेशा समाज के सभी वर्गों को एक साथ रखा. अल्ताफ के नामांकन से स्थानीय लोगों में उत्साह देखा जा सकता है. उनका समावेशी दृष्टिकोण उनकी उम्मीदवारी का मुख्य आकर्षण है.

वहीं मियां अल्ताफ ने सीट के लिए नामांकन की घोषणा के बाद कहा, “मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है। मैं पहले भी लोगों के लिए काम करता रहा हूं और मैं ऐसा करना जारी रखूंगा.”

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो अनंतनाग संसदीय सीट पर लगभग छह लाख गुज्जर वोट हैं, जो राजौरी और पुंछ के जुड़वां जिलों और दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में फैला हुआ है. समुदाय के लगभग 20 प्रतिशत मतदाता उनके अनुयायी हैं जो उनके पक्ष में मतदान करेंगे, जबकि वह अपने पंथ व्यक्ति और पार्टी के प्रभाव के कारण 25 से 30 प्रतिशत अधिक वोट लाने में सक्षम हो सकते हैं.

कौन हैं मियां अल्ताफ

मियां अल्ताफ 1987 से लगातार मंत्री और कश्मीर के कंगन से विधायक रहे हैं. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीवन का पहला चुनाव लड़ा था. बाद में वह एनसी में शामिल हो गए. वह अपने पिता और प्रभावशाली गुज्जर राजनीतिक और धार्मिक गुरु मियां बशीर अहमद और दादा मियां निज़ामुद्दीन के उत्तराधिकारी बने, जो दोनों विधायक और मंत्री थे.

मियां अल्ताफ का परिवार 1962 के बाद से कंगन से लगातार 10 विधानसभा चुनाव जीता है. जिसमें मियां निज़ामुद्दीन ने 1962 का विधानसभा चुनाव जीता, फिर उनके पुत्र मियां बशीर अहमद ने बाद में 1967 से 1987 तक विधानसभा चुनाव जीते. इसके बाद मियां बशीर के पुत्र अल्ताफ अहमद इस सीट से 1987, 1996, 2002, 2008 और 2014 में जीत दर्ज की थी.

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