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मध्यप्रदेश: डिंडोरी में 27 वर्षीय आदिवासी महिला ने बनाया दुर्लभ बीजों का बैंक

Posted on February 3, 2023 - 12:51 pm by

ऐसे समय में जब नरेंद्र मोदी सरकार भारत को ‘श्री अन्ना’ (मिलेट्स) की खेती और अनुसंधान का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है. बैगा आदिवासी महिला लहरी बाई (27वर्षीय) अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष में मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में मोटे अनाज का एक वास्तविक ब्रांड एंबेसडर के रूप में उभरी हैं.

मिलेट्स यानी मोटे अनाज. इन्हें सुपर फूड भी कहा जाता है. सुपर फूड इसलिए क्योंकि ये पोषक तत्वों का खजाना हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस साल को मिलेट्स ईयर घोषित किया है. 

सिलपाड़ी गांव की रहने वाली लहरी बाई बैगा आदिवासी समुदाय से है. (जिन्हें विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूहों में गिना जाता है) लहरी बाई अपने माता-पिता के साथ दो कमरे के इंदिरा आवास घर में रहती हैं. जहां एक कमरा लिविंग रूम और किचन के रूप में है. वहीं दूसरे को बीज बैंक में बदल दिया गया है, जिसमें कोदो, कुटकी, सनवा, मढ़िया, सालहर और काग फसलों सहित बाजरा के लगभग 30 से अधिक दुर्लभ बीजों का संरक्षण किया गया है.

जानिए बीज बैंको के बारें में

कोदो में बड़ी कोदो, लदरी कोदो, छोटी कोदो, बहेरा कोदो.

कुटकी में सफेद कुटकी, बड़ी डोंगर, लाल डोंगर, सिताही नागदमन, मदेली, चार कुटकी, छोटी कुटकी, बिरनी कुटकी.

सावा में भालू, कुशवा, छिदरी.

मढिया में लाल गोदपारी, चावर, मरामुठ.

सलहार में बैगा, ऐंठी, काढा.

काग में भूरसा, सफेद, लाल, कलकी, करिया कलकी.

दलहनी में बैगा अरहर, झुझर, बिदरी, हिरवा, सुतख इत्यादि

कभी उपहास किया जाता था

इन बीजों को लहरी बाई ने अपने खेत (कृषि भूखंड) के एक हिस्से में बोया है. इसके बाद बहुगुणित बीज किस्मों को उसके गाँव के साथ-साथ अन्य 15-20 गाँवों में किसानों को बिना किसी मूल्य के वितरित किया जाता है. जो 54 गाँवों के मजबूत बैका चक (बैगा आदिवासी आबादी के गाँव) का हिस्सा बनते हैं. बदले में किसान उसे अपनी उपज का एक छोटा सा हिस्सा उपहार में देते हैं. लेकिन एक दशक लंबी यात्रा एक परी कथा होने से बहुत दूर है. लहरी याद करते हैं कि कैसे एक किशोरी के रूप में उनका अपने ही समुदाय द्वारा अक्सर उपहास किया जाता था.

लहरी ने कहती है कि लोगों ने मेरा उपहास उड़ाया और अक्सर मुझे दूर कर दिया. लेकिन मेरे पास केवल दो मिशन थे, एक शादी न करना और माता-पिता की आजीवन सेवा करना. दूसरा बाजरे के बीज का संरक्षण करना और उनकी खेती को बढ़ावा देना, अब कोई मेरा अपमान नहीं करता है.

कभी स्कूल नहीं गई, पीएचडी के छात्रों का कर सकती है मार्गदर्शन

डिंडोरी के जिला कलेक्टर विकास मिश्रा ने लहरी को जोधपुर स्थित आईसीएआर की प्रतिष्ठित 10 लाख की छात्रवृत्ति के लिए नामित किया है. बता दें कि लहरी बाई कभी स्कूल नहीं गई है.  कलेक्टर कहते हैं कि अगर वह छात्रवृत्ति प्राप्त करने में सफल होती है, तो वह पीएचडी छात्रों का मार्गदर्शन करती नजर आएगी.

इसलिए मोटे अनाज हैं सुपर फूड

मोटे अनाज कैल्शियम, आयरन, जिंक, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, पोटेशियम जैसे खनिजों का समृद्ध स्रोत होते हैं. इसमें आहार फाइबर और विटामिन जैसे फोलिक एसिड, विटामिन बी-6, बीटा कैरोटीन और नियासिन पर्याप्त मात्रा में होती है. उच्च मात्रा में लेसिथिन की उपलब्धता तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने के लिए उपयोगी होती है.

(photo : TNIE)

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