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मध्यप्रदेश: आदिवासी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए बोट एम्बुलेंस शुरू

Posted on March 20, 2023 - 5:39 pm by

मध्य प्रदेश के धार, अलीराजपुर और बड़वानी जिलों में नर्मदा नदी के किनारे रहने वाली आदिवासियों के लिए सरकार ने एक पहल की है, जिसमें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिले इसके लिए सरकार आदिवासी क्षेत्रों में ‘बोट एम्बुलेंस’ शुरू कर रही है.

नाव एंबुलेंस विंध्याचल और सतपुड़ा के पहाड़ी क्षेत्रों के बीच चलेगी, ताकि इन जिलों में नर्मदा के किनारे रहने वाले आदिवासी लोगों को आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें.

यह पहल पहल नर्मदा समग्र न्यास द्वारा शुरू की गई है. नर्मदा समग्र न्यास पिछले 15 वर्षों से स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि संबंधी सेवाएं प्रदान करने के लिए लगातार काम कर रही है. संस्था का उद्देश्य हर व्यक्ति को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है.

एएनआई के रिपोर्ट के अनुसार  मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने कहा, “नर्मदा समग्र न्यास ने अच्छा काम किया है. मैं बीजेपी के पूर्व राज्यसभा सांसद स्वर्गीय अनिल कुमार दवे के प्रयासों को याद करना चाहता हूं जिन्होंने काम जारी रखने के लिए प्रेरणा दी है.

उन्होंने यह पहल 2011 में शुरू की थी और उस समय ग्रामीणों को डर था कि यह सफल नहीं होगा लेकिन यह सफल रहा और ग्रामीणों को इसका लाभ मिला है.

अब यह नई नाव एम्बुलेंस अधिक उन्नत है, इसमें 1.5 गुना अधिक जगह है. एम्बुलेंस 40 एचपी के पेट्रोल इंजन द्वारा संचालित है और यह चुपचाप चलेगी. एम्बुलेंस अपने मार्ग के अनुसार एक सप्ताह में लगभग 100 किमी के दायरे को कवर करेगी. इसमें एक रेजिडेंट डॉक्टर होगा, आवश्यक जीवन रक्षक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और पांच दिनों का इसका रूट भी पूर्व नियोजित होगा.

प्रशासन से कहा गया है कि लोगों को एंबुलेंस की जानकारी दी जाए. मंत्री ने कहा कि सरकारी टीम सहित सभी आवश्यक सहायता उन्हें दी जाएगी. जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, 108 एंबुलेंस शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि बोट एंबुलेंस से न केवल मध्य प्रदेश बल्कि गुजरात और महाराष्ट्र के जिलों को भी लाभ होगा क्योंकि यहां तीन राज्यों की सीमा जुड़ती है. बोट एंबुलेंस आने वाले दिनों में इलाके में काफी मददगार साबित होगी.

कैबिनेट मंत्री दत्तीगांव ने कहा, “इसके अलावा, हमें इस क्षेत्र में एक चुनौती का सामना करना पड़ता है कि हम मोबाइल टावरों की नहीं होने के के कारण ठीक से संवाद नहीं हो पाती है. इसलिए हमने पुरानी नाव में एक अस्थायी रेडियो स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई है. पुलिस विभाग से फ्रीक्वेंसी के बारे में चर्चा चल रही है. हमने बीएसएनएल से संचार में सुधार के लिए क्षेत्र में कुछ टावर स्थापित करने का भी अनुरोध किया.”

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