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मध्यप्रदेश: चिलोरा के जंगल में है 10वीं शताब्दी का गांगलीराजा मंदिर

Posted on January 30, 2023 - 5:21 pm by

मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में बिरसा क्षेत्र के आदिवासी गांव चिलोरा के जंगल में गांगलीराजा का 10वीं शताब्दी का मंदिर है. यहां पर शिवरात्रि पर्व से छह माह तक लगातार पूजा अर्चना जारी रहती है. गांगलीराजा की पूजा अर्चना टेकाम परिवार पांच पीढ़ियों से करते आ रहा है. जिसमें राजा झामसिंग के बाद अकाल सिंह, अकालसिंह के बाद कमलसिंह, कमलसिंह के बाद रेवाराम टेकाम एवं उनके बेटों द्वारा आज भी पूजा करवाई जाती है. इस मंदिर तक जाने के लिए कच्चा मार्ग है, लेकिन पुरातत्व विभाग की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

गांगलीराजा मंदिर का इतिहास

मान्यता है कि गोंड राजा झामसिंग टेकाम को गांगलीराजा ने सपने में आकर कहा था कि मुझे कटंग की झाड़ियों से हटाकर पूजा अर्चना करे, तब तत्कालीन राजा ने अपनी प्रजा के साथ जाकर वहां साफ सफाई कर पूजा अर्चन प्रारंभ की. उसके बाद से आज तक पूजा अर्चना जारी है. राजा झामसिंग के पूर्वज भी यहां पूजा अर्चन करते थे. बता दें कि मंदिर क्षेत्र में वर्षाकाल छोड़कर आठ माह तक लोगों का आना जाना लगा रहता है.

इतिहास एवं पुरातत्व संग्रहालय बालाघाट के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह गहरवार का कहना है कि चिलोरा गांव में जंगल में गांगलीराजा का मंदिर है. यहां पर आदिवासी समाज के लोग पूजा अर्चना करते है. मंदिर तक पहुंचने के लिए कच्चा मार्ग है. मार्ग को बनाने के लिए वरिष्ठ स्तर पर पत्र व्यवहार किया गया है. यह मंदिर 10वीं शताब्दी की है.

इस मंदिर को लेकर वहां के ग्रामसभा अध्यक्ष एवं बैहर के पर्यावरण बचाओ समिति के भूपेंद्र टेकाम का कहना है कि चिलोरा के जंगल में गांगलीराजा की पूजा अर्चना गोंड समाज द्वारा की जाती है. आने जाने के लिए रास्ता बन जाता है तो लोगों को किसी तरह से परेशानी नहीं होगी. इस स्थान को पर्यटन स्थल बनाने की मांग की जाएगी.

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