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महाराष्ट्र: आदिवासी महिला की फर्जी दस्तावेज बना ठगी, छह लोग धराये

Posted on November 28, 2022 - 5:39 pm by

ठाने पुलिस ने भिवंडी के दुगड़ गांव की एक 73 वर्षीय बुजुर्ग आदिवासी महिला भागीरथी मुक्ने के मामले में संज्ञान लिया है. मामले पर पुलिस ने इस सप्ताह गांव के सरपंच सहित अन्य छह लोगों को गिरफ्तार किया. स्थानीय अखबार की रिपोर्ट पर पुलिस की कार्रवाई शुरू होने के बाद  मुक्ने लापता हो गई हैं.

क्या है पूरा मामला

जालसाजों ने कथित तौर पर एसडीओ, भिवंडी के कुछ सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से मुक्ने के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया. उन्होंने मृत महिला ठकी सख्या सावर को जीवित दिखाने के लिए उसका फर्जी आधार कार्ड, बैंक खाता और संबंधित दस्तावेज बनाया. ताकि मुंबई-वडोदरा राजमार्ग में उपयोग सावर के जमीन का मुआवजा प्राप्त किया जा सके. संबंधित दस्तावेज बनाने के लिए मुक्ने के बायोमेट्रिक विवरण और तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया था.

पुलिस ने इस मामले में मुक्ने समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया. श्रमजीवी संगठन के महासचिव  बलराम भोईर ने कहा कि 9 नवंबर को एक स्थानीय अखबार में कहानी प्रकाशित होने के बाद जालसाजों ने मुक्ने को किसी अज्ञात स्थान पर रखा है. उसकी भी तलाश की जा रही हैं. लेकिन न तो वह और न ही उसकी बेटी बेटी गांव और आस-पास के इलाकों में मिल रही है.

छह लोगों को हिरासत में लिया गया

जांच अधिकारी इंस्पेक्टर वीरेंद्र मोहिते ने कहा कि एक प्राथमिकी दर्ज की गई है. हमने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है. इस महीने की शुरुआत में मामला सामने आने के बाद एक आरोपी ने सरकारी खाते में 57 लाख रुपये भी जमा कराए हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या मुक्ने का पता नहीं चल रहा है.  मोहिते ने कहा कि उसे प्राथमिकी में आरोपी बनाया गया है. लेकिन इस मामले में उसका बयान दर्ज करना हमारे लिए महत्वपूर्ण था. हम उसकी तलाश कर रहे हैं लेकिन वह दुगड़ गांव में अपने घर में नहीं है.

बता दें कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें राजेश भोईर, मुक्ने के पोते भूषण अशोक नंदविस्कर, मोरेश्वर चंद्रकांत पाटिल, सुधाकर सखाराम गुंडोलकर, अनीस मोमिन और मोहम्मद ताहा शामिल हैं.

फर्जी दास्तावेज बनाने वाले उसी के गांववाले

श्रमजीवी संगठन कार्यकर्ता जयेंद्र गोविंद गावित ने कहा कि तीन आरोपी मुक्ने के एक ही गाँव के हैं. मुक्ने के पोते भूषण ने जमीन के लिए सरकारी मुआवजे का दावा करने के लिए फर्जी दस्तावेज बनाने के लिए अपना पता, अन्य विवरण और अंगूठे के निशान दिए.

गुंडोलकर अपना बैंक खाता बनवाने की गवाह बनीं. फर्जी आधार कार्ड बनवाने के लिए सरपंच राजेश भोईर जिम्मेदार था. अन्य दो व्यक्ति- मोमिन और ताहा एजेंट हैं जिन्होंने इस रैकेट में फर्जी आधार कार्ड बनाया था.

बलराम भोईर ने आगे कहा कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है.  वे इस बड़े रैकेट के मोहरे हैं. मास्टरमाइंड खुले में घूम रहे हैं और मामले को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. चूंकि मुक्ने अनपढ़ हैं, वे अवश्य ही कुछ अन्य योजनाएं बनाने की कोशिश कर रहे होंगे. पुलिस को मुक्ने की तलाश करनी चाहिए और इस मामले में उसका बयान दर्ज करना चाहिए. साथ ही उसकी बेटी बेबी कहां है, जो मास्टरमाइंड के कहने पर उसे बैंक ले जाती थी? पुलिस इस मामले में बेबी की तलाश क्यों नहीं कर रही है? बलराम भोईर ने बताया मामला संज्ञान में आने के बाद  मोरेश्वर पाटिल ने सरकारी खाते में 57 लाख रुपये जमा किया गया. मैं जानना चाहता हूं कि उसके पास इतना पैसा कैसे आया. उसे सरकारी खाते में पैसा जमा कराने में किसने मदद की?  इसकी भी जांच होनी चाहिए.

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