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मणिपुर: ईमा मार्केट, यहां केवल महिलाओं को दुकान लगाने की है इजाजत

Posted on February 17, 2023 - 5:31 pm by

भारत में एक ऐसा बाजार है जहां केवल महिलाएं दुकानदार के रूप में काम करती हैं. यह सिर्फ भारत का ही नहीं बल्कि पूरे एशिया का सबसे बड़ा महिलाओं का बाजार है. सदियों पुराना महिलाओं का यह बाजार पूर्वोत्तर भारत के खूबसूरत राज्यों में से एक मणिपुर के इम्फाल में बसा हुआ है. इस बाजार का नाम ईमा कैथल है जो महिलाओं के सबसे बड़े बाजार के रूप में प्रसिद्ध है. ईमा का अर्थ होता है मां और कैथल का मतलब होता है बाजार, इसी से यह नाम पड़ा है यानि मांओं द्वारा लगाया गया बाजार. माना जाता है कि यह बाजार पांच सौ साल से लगते आ रहा है.

सिर्फ व्यापार नहीं, राजनीतिक विषयों की होती है चर्चा

बता दें कि मणिपुर के पर्यटन स्थलों में ईमा कैथल की भी लोकप्रियता काफी है. महिलाएं यहां ना केवल दुकान लगाकर सामान बेचती हैं बल्कि राज्य सहित देश में चल रहे व्यवसायिक व राजनीतिक विषयों पर भी चर्चा करती रहती हैं. यह बाजार महिला उद्यमियों के लिए रोजगार के मंच का काम करता है.

ईमा मार्केट का दृष्य/कलिंगा टीवी

ईमा कैथल में सौ या दो सौ नहीं होकर, करीब 5000 महिलाएं दुकान लगाती हैं. महिलाओं की इतनी संख्या का बाजार में होने से पता लगता है कि यह किनता भव्य होगा. बताया जाता है कि ईमा कैथल में केवल शादी-सुदा औरतों को ही दुकान लगाने की इजाजत है. पुरुषों का यहां दुकान लगाना वर्जित है, लेकिन खरीददारों को यहां किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है. बच्चे, जवान या बूढ़े कोई भी बाजार का लाभ उठा सकते हैं.

क्या है ईमा कैथल के बनने की कहानी

ईमा कैथल में लगभग हर प्रकार के सामान उपलब्ध है. सब्जी, फल, अनाज, मांस, मछली आदि खाने पीने के सामाग्रियों से लेकर पहनने के लिए पारंपरिक कपड़े व सृंगार के आभूषण भी बाजार में बेचे जाते हैं. इलाके के लोग यहां रोजमर्रा के सामान लेने तो आते ही हैं, देश-दुनिया से आए पर्यटक भी इस अनोखे व आकर्षक बाजार की ओर खींचे चले आते हैं. यदि आप पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर राज्य में पर्यटन के लिए जाते हैं तो एक बार ईमा कैथल का आनंद भी जरूर लें.

ईमा कैथल के शुरुआत के पीछे भी एक कहानी है. कहा जाता है कि इस बाजार को 16वीं शताबदी में 1533 से लगाया जा रहा है. उस वक्त पुरुष खेती जैसे कामों के लिए घर से बाहर जाया करते थे और महिलाएं घर में रहे-रहे बाजार लगाने लगीं. तब केवल कुछ ही महिलाएं बाजार में बैठती थीं. धीरे-धीरे यह विस्तृत होते चला गया और आज के दौर में एशिया का सबसे बड़ा महिलाओं का बाजार बन गया है.

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