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मणिपुर: एसटी की मांग को सांप्रदायिक रंग देना बंद करें – ATSUM

Posted on February 1, 2023 - 1:02 pm by

मेइती/मीतेई समुदाय द्वारा एसटी श्रेणी में शामिल करने की मांग का ATSUM ने विरोध किया है. ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन, मणिपुर (ATSUM) ने विरोध को दोहराते हुए इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने से रोकने के लिए कहा है. एटीएसयूएम ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हाल के दिनों में आदिवासी समुदायों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश की जा रही है. इसके जरिए एसटी मांग समर्थकों द्वारा इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने का निरंतर प्रयास में तेजी आई है. मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए वह भी सरकार की नाक के नीचे हो रही है, लेकिन इस तरह के बचकाने प्रयास सफल नहीं होंगे.

एटीएसयूएम ने आगे कहा कि मणिपुर सरकार चुप क्यों है जब एसटी की मांग के समर्थकों की ओर से रोज़ाना खुले तौर पर इतने अधिक सांप्रदायिक स्वर सामने आ रहे हैं. जबकि उन्हें जोड़ने की कोशिश करने के बजाय ऐसा लगता है कि खुला छोड़कर सरकार मौन रूप से उन्हें प्रोत्साहित कर रही है.

छात्र संगठन ATSUM ने कहा कि महीनों से हम इस उम्मीद के साथ मांग के प्रस्तावक द्वारा चुपचाप इन सभी हथकंडों को देख रहे हैं. लेकिन ऐसा लगता है कि हमारी चुप्पी को कायरता समझा जाता है. अब हमारा धैर्य अपने अंत तक पहुंच रहा है और हमारे संयम का परिक्षा लिया जा रहा है. यह हमारा स्पष्ट रुख है कि मणिपुर सरकार को इस मामले में यथास्थिति बनाए रखनी चाहिए और किसी का पक्ष नहीं लेना चाहिए. लेकिन मेइती मंत्रियों और विधायकों द्वारा व्यक्त किया गया खुला समर्थन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यह सरकार तटस्थ नहीं है, लेकिन जिसका समर्थन मेइती समुदाय की ओर है.

एटीएसयूएम ने कहा कि इस अतार्किक मांग का विरोध अटल है और अभी और भविष्य में और अधिक जोश और दृढ़ता के साथ विरोध किया जाएगा. छात्र निकाय ने कहा कि असंख्य अवसरों पर हमने सार्वजनिक रूप से मांग के विरोध के कारण और तर्क बताए हैं क्योंकि यह आने वाले दिनों में मणिपुर के आदिवासी समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है.

कई महीनों तक इस मामले पर 20 आदिवासी विधायकों की गगनभेदी चुप्पी जब उनके मेतेई समकक्ष खुले तौर पर सामने आए हैं. बहुत सारे सवाल खड़े कर रहे हैं जिससे आदिवासी आबादी के मन को आंदोलित किया जा रहा है. उन्हें अपना पक्ष रखना चाहिए नहीं तो यह समझा जाएगा कि आप उनकी मांग का समर्थन कर रहे हैं. जब राज्य के सभी आदिवासी इस मामले पर एकमत हैं तो इसमें डरने की क्या बात है? अपने लोगों की भावनाओं के साथ तैरें और जिनका आप प्रतिनिधित्व करते हैं. ATSUM ने तब मणिपुर के सभी आदिवासी समुदायों से इस मुद्दे पर एकजुट होने और बदले में इस अतार्किक मांग के खिलाफ लड़ाई में अपना योगदान देने का आह्वान किया.

बता दें कि मेइतेई या मीतेई को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने के लिए 31 जनवरी को मणिपुर में विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किया गया. शेड्यूल ट्राइब डिमांड कमेटी मणिपुर (STDCM) ने कोइरंगी क्षेत्रों के 20 से अधिक स्थानीय क्लबों और 20 महिला संगठनों के सहयोग से कोइरंगी बाजार कम्युनिटी हॉल में ST सूची में मीतेई या मीतेई को शामिल करने के संबंध में एक सार्वजनिक बैठक आयोजित की है.

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