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मणिपुर: आदिवासी अधिकार निकाय ने वन से आदिवासियों के जबरन बेदखली  का विरोध किया

Posted on February 25, 2023 - 2:58 pm by

ज्वाइंट कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑन ट्रइबल राइट्स, मणिपुर (JCCOTR-M) ने मणिपुर के कांगचुप चिरू में हो रहे आदिवासियों के जबरन बेदखली का विरोध किया. बता दें कि मणिपुर सरकार द्वारा हाल ही में पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष रूप से कांगचुप गेलजैंग सब-डिवीजन के कांगचुप चिरू और हेंगलेप सब-डिवीजन के के सोंगजैंग गांव में जबरन बेदखली अभियान चलाया. जहां सैकड़ों ग्रामीणों को बेघर कर दिया गया. आदिवासियों के साथ असभ्य व्यवहार, हिंसा और मानवीय मूल्यों की कमी को दर्शाता है. JCCOTR-M ने राज्य सरकार के इस “अमानवीय कार्य” की कड़े शब्दों में निंदा की है.

एक बयान में 24 फरवरी को JCCOTR-M ने कहा कि पहाड़ियों में रहने वाले आदिवासी परंपरागत रूप से जंगल में रहते हैं और उनकी आजीविका जंगलों और इसकी उपज पर निर्भर करती है. आदिवासी समुदाय वर्षों से इन वन भूमि में रहते हैं और साथ ही वनों का विवेकपूर्ण उपयोग करके संरक्षण के जनजातीय पारंपरिक तरीकों के माध्यम से पर्यावरण की रक्षा करते हैं.

राज्य की भाजपा सरकार को यह समझना चाहिए कि जंगलों और आदिवासियों को किसी भी हालत में अलग नहीं किया जा सकता है. इसलिए राज्य सरकार को बंदोबस्त के लिए वैकल्पिक भूमि और खोई हुई संपत्तियों की लागत सहित पुनर्वास की व्यवस्था की मांग की. इसलिए JCCOTR-M ने कहा कि कथित रूप से आरक्षित वनों के अंदर स्थित गांवों का सरकारी मशीनरी और राज्य बल का गैरकानूनी बल प्रयोग कर “जबरन बेदखली” किया जाना गलत है.

क्या है पूरा मामला

कांगपोकपी वन अधिकारी एन. गणेश के अनुसार पाया गया कि आरक्षित वन के अंदर रहने वाले गांव भारतीय वन अधिनीयम 1927 के द्वारा निर्धारित अधिनियमों का उल्लंघन करते हुए आरक्षित वनों पर अतिक्रमण कर रहे हैं. जिसके बाद मणिपुर वन नियम, 2021 का पालन करते हुए अतिक्रमण हटाने के नोटिस जारी किए थे. और वहां रहने वाले लोगों के खिलाफ एफआरआई भी की गई थी. जिसके बाद गांवों में बेदखली का अभियान चलाया गया और ग्रामिणों के साथ पुलिस बल ने हिंसा का प्रयोग किया.

हालांकि इंफाल फ्री प्रेस के अनुसार कांगचुप चिरू युत क्लब के अध्यक्ष जेडी थोनसिंग ने दावा किया है कि वन अधिकारियों ने ग्रामीणों को पहले किसी भी प्रकार की नोटिस नहीं दी थी.

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