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कई आदिवासी समुदाय खत्म होने की कगार पर हैं: एन.  के. सेल्वराज

Posted on November 24, 2022 - 4:01 pm by

तमिलनाडु में 36 आदिवासी समुदायों में से टोडा, कोटा, कुरुम्बा, इरुला, पनिया और कट्टुनायकन खत्म होने के कगार पर हैं. सरकार आदिवासी समुदायों की आजीविका बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है. आदि द्रविड़ व आदिवासी कल्याण मंत्री एन कयालविझी सेल्वराज ने ऊटी स्थित जनजातीय संस्कृति अनुसंधान केंद्र में कहा.

तमिलनाडु में ‘आदिवासी समुदायों के सतत विकास: मुद्दे और चुनौतियां’ को लेकर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया था.

पिछले साल की तुलना में अधिक आदिवासी छात्र स्कूल में शामिल हुए

वह आगे कहती हैं कि आदिवासी समुदायों में राज्य की कुल आबादी का केवल 1.1% शामिल है. उनकी साक्षरता दर 54.5% है, जबकि राज्य की साक्षरता दर 81% है. पिछले साल 320 सरकारी आदिवासी आवासीय विद्यालयों और आठ एकलव्य मॉडल स्कूलों पर सरकार के विशेष ध्यान के लिए धन्यवाद. पिछले साल की तुलना में इस शैक्षणिक वर्ष में 4,000 अधिक आदिवासी छात्र सरकारी आदिवासी स्कूलों में शामिल हुए.

कयालविझी ने कहा कि सरकार ने सरकारी आदिवासी स्कूलों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 45.79 करोड़ रुपये आवंटित किए और पिछले शैक्षणिक वर्ष में 35,953 आदिवासी छात्रों को लाभान्वित करने वाली छात्रवृत्ति के लिए 50.5 करोड़ रुपये मंजूर किए.

आदिवासी समस्याओं का समाधान निकाला जाएगा

बता दें कि ऊटी में आयोजित इस सेमिनार में राज्य भर के शोधकर्ता और कॉलेज के छात्र भाग ले रहे हैं.  मंत्री ने कहा कि दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी में विद्वानों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली शोध रिपोर्टों के आधार पर सतत विकास के मार्ग में आदिवासी समुदायों के सामने आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का समाधान निकाला जाएगा. इसके साथ मंत्री ने आदिवासी स्कूलों और स्वयं सहायता समूहों को तमिलनाडु आदि द्रविड़ आवास और विकास निगम लिमिटेड (तहडको) द्वारा प्रदान की गई .

आदि द्रविड़ और आदिवासी कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टीएस जवाहर और नीलगिरि के कलेक्टर एसपी अमृत समारोह में शामिल हुए. इससे पूर्व कयालविझी ने ऊटी के निकट मुथोराई पलाडा स्थित जनजातीय अनुसंधान केन्द्र में 21 लाख की लागत से आयोजित सूचना केन्द्र एवं फोटो प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया.

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