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Meghalaya Election: दिलचस्प हुआ मेघालय चुनाव, गठबंधन की पार्टियां क्यों लड़ रही एक दूसरे के खिलाफ

Posted on February 18, 2023 - 5:35 pm by

मेघालय में सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी इस विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं. मेघालय की 60 सीटों पर 27 फरवरी को मतदान होना है और इस पहाड़ी राज्य में बहुदलीय मुकाबला चल रहा है. वर्ष 2018 के अल्प जनादेश के बाद मेघालय में मेघालय डेमोक्रेटिक एलायंस (एमडीए) का शासन था, जिसमें नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी), बीजेपी, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, हिल स्टेट पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और एक निर्दलीय शामिल थे.

एनपीपी ने आगामी चुनाव के लिए 57 उम्मीदवारों की सूची की घोषणा की. जबकि भाजपा सभी 60 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. मेघालय में मुख्य विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस ने 56 उम्मीदवार खड़े किए हैं. कांग्रेस ने 60 और यूडीपी ने 46 उम्मीदवारों को टिकट दिया है.

बता दें कि मेघालय मातृसत्तात्मक समाज वाला ईसाई बहुल राज्य है.

बीजेपी ने मौजूदा सरकार में अपनी साझीदार एनपीपी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. बीजेपी ने अपने चुनाव घोषणापत्र में भ्रष्टाचार के सभी मामलों की जांच करने और पार्टी शासित असम के साथ सीमा मुद्दों को हल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के तहत एक विशेष टास्क फोर्स स्थापित करने का वादा किया है. इसमें सुरक्षा और कानून के शासन को बढ़ावा देने के लिए सीमा पर स्थायी चौकियां स्थापित करने का भी वादा किया है.

तुरा में 17 फरवरी को एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मेघालय सबसे भ्रष्ट राज्यों में से एक है, जहां केंद्रीय योजनाओं के तहत आवंटित धन लोगों तक पहुंचने से पहले ही गायब हो गया.

गृह मंत्री ने आगे कहा कि 50 वर्षों से मेघालय में कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है. असम में हमने पांच मेडिकल कॉलेज बनाए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेघालय के लिए दो मेडिकल कॉलेजों का प्रस्ताव रखा. हालांकि राज्य सरकार कोई निर्माण करने में असमर्थ थी. मंत्री ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मेघालय देश में सबसे धीमी गति से विकास कर रहा है.

उन्होंने कहा कि भाजपा ने गठबंधन से नाता तोड़ लिया है और सभी 60 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.

एनपीपी ने तृणमूल को बताया बाहरी

इस बीच एनपीपी ने भाजपा को एक ईसाई विरोधी पार्टी बताया. इसके अलावा एनपीपी नेता और मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने मेघालय में तृणमूल को “बाहरी” करार दे दिया है. तृणमूल ने सत्ता में आने पर असम के साथ सीमा समझौते को खत्म करने का वादा किया है. सीमा विवाद को सुलझाना 2018 में एनपीपी के वादों में से एक रहा है. लेकिन पिछले साल नवंबर में सीमा पर झड़पों और पुलिस की गोलीबारी के बाद राज्यों के बीच बातचीत को झटका लगा था, जिसमें मेघालय के पांच नागरिकों और असम के एक वन रक्षक की मौत हो गई थी. संगमा पर विपक्ष नरम और मूकदर्शक होने का आरोप लगाता रहा है. तृणमूल का दावा है कि उन्हें असम से डिक्टेट किया जा रहा है.

वहीं तृणमुल कांग्रेस के नेता मुकुल संगमा ने पिछले महीने उत्तरी गारो हिल्स में मेंदीपथार में कहा कि हमें अपने जनजातियों की रक्षा करने और भाजपा के खिलाफ लड़ने की जरूरत है, केवल हथियारों से नहीं बल्कि एकता की शक्ति से.

मुकुल ने आगे कहा कि मेघालय और असम के बीच सीमा मुद्दे में हमने देखा है कि भूमि असम को दी गई थी. यह रिमोट-नियंत्रित सरकार की विफलता के कारण है.

एनपीपी का दावा है कि मेघालय ने पिछले पांच सालों में विकास किया है. राज्य ने उत्तर-पूर्व भारत और पश्चिम बंगाल के लगभग हर राज्य की तुलना में उच्च मानव विकास हासिल किया है. अवैध कोयला खनन मुख्य मुद्दों में से एक है. भाजपा ने अपने घोषणापत्र में कहा कि वह अवैध खनन की जांच करने और कोयले के वैज्ञानिक खनन को सुनिश्चित करने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन करेगी.

विधायकों का पलायन

मेघालय में कांग्रेस के दो विधायक मजेल अंपारीन लिंगदोह और महेंद्रो रैपसांग पिछले साल 19 दिसंबर को एनपीपी में शामिल हुए थे. पिछले साल फरवरी में कांग्रेस आलाकमान ने केंद्र और राज्य के नेताओं को अंधेरे में रखते हुए राज्य सरकार का समर्थन करने के लिए पार्टी के पांच विधायकों के निलंबन को मंजूरी दे दी थी. विधायक तब से एमडीए गठबंधन में शामिल हो गए हैं.

इससे पहले नवंबर 2021 में पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा के नेतृत्व में कांग्रेस के तत्कालीन 17 में से 12 विधायकों ने स्पीकर को एक पत्र सौंपा था. जिसमें उनके समूह के तृणमूल कांग्रेस में विलय की घोषणा की गई थी. इस बीच एनपीपी के दो विधायक और एक तृणमूल सदस्य ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए. हाल ही में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष बर्नार्ड मारक को वेश्यालय चलाने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद भाजपा और एनपीपी के बीच संबंध खराब हो गए. बीजेपी ने उनकी गिरफ्तारी को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बताया था.

बर्नार्ड मारक जमानत पर बाहर आकर गारो हिल्स में दक्षिण तुरा से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां उनका मुकाबला मुख्यमंत्री कोनराड संगमा से होगा. मारक ने 2014 में हथियार डाल दिए थे और अचिक नेशनल वालंटियर काउंसिल उग्रवादी संगठन के एक गुट को भंग कर दिया था. पिछली बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 21 सीटें जीती थीं, जबकि एनपीपी को 19 सीटें मिली थीं. एनपीपी ने बाद में विलियमनगर सीट भी जीती थी.

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