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मेघालय: आदिवासियों को कौन सा ऐतिहासिक सौगात मिला?

Posted on November 12, 2022 - 12:30 pm by

मेघालय के सीएम कोनराड के. संगमा ने 11 नवंबर को एक ऐतिहासिक कदम उठाया है.  जो राज्य के आदिवासी परिवारों के लिए बड़ा सौगात है. राज्य सरकार ने पश्चिम गारो हिल्स के रिजर्व गित्तिम गांव के आदिवासी परिवारों को भूमि स्वामित्व अधिकार ट्रांसफर कर दिया. संगमा ने एक समारोह में जमीन मालिकों की दशकों पुरानी मांगों को पूरा कर दिया. उनकी सरकार ने 100 आदिवासी परिवारों को ‘भूमि पट्टा’ प्रदान किया.

पूर्वोत्तर में भूमि स्वामित्व की मांग बढ़ी है

हांलाकि मेघालय के पास भारत के अन्य हिस्सों की तरह जमीन का मालिकाना हक नहीं है. इसपर अधिकारियों ने बताया कि झूम खेती (कृषि की जला और ट्रांसफर करने की विधि) और विशिष्ट सामाजिक संरचना की अनूठी और पारंपरिक कृषि प्रणालियों के कारण पूर्वोत्तर राज्य के पास स्पष्ट भूमि स्वामित्व नहीं हैं. मेघालय को साल 1972 में राज्य का दर्जा दिए जाने के बाद से  मेघालय के आदिवासी भूमि पर अपने अधिकारों को मान्यता देने का अनुरोध कर रहे हैं. असम राज्य से दो जिलों को अलग करके मेघालय बनाया गया था. जिसके कुल 30 लाख आबादी में से 86 प्रतिशत से अधिक आदिवासी हैं.

इधर बढ़ती आधुनिक खेती के साथ  भूमि के स्पष्ट चकबंदी और उसके स्वामित्व की मांग में वृद्धि हुई है. इससे दिन प्रतिदिन चुनौती का विषय बनते जा रहा है. मेघालय सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि 19 अगस्त, 2018 को मुख्यमंत्री संगमा को एक ज्ञापन सौंपा गया था. ज्ञापन में लोगों के सामने आने वाली चुनौती को हल करने की मांग की गई थी. भूमि अभिलेखों और औपचारिक दस्तावेजों की अनुपस्थिति ने सही मालिकों की पहचान करने में एक चुनौती पेश की. अधिकारी ने बताया कि पिछले दो सालों के दौरान भूमि अधिकार से संबंधित सभी कानूनी बाधाओं को दूर किया गया. कोविड -19 महामारी के बावजूद  भूमि के बहुत आवश्यक सीमांकन को पूरा करने के लिए यह कोशिश की गई.

भूमि पर अधिकार जनजातीय पहचान की कुंजी है सीएम संगमा ने कहा कि भूमि पर अधिकार हमारे लोगों की आदिवासी पहचान की कुंजी है. इसलिए सही मालिकों को भूमि अधिकारों का हस्तांतरण हमारे सर्वोच्च एजेंडे में से एक है. पिछले साढ़े चार साल के कार्यकाल में हमने रिजर्व गित्तिम के लोगों की मदद करने के लिए सब कुछ किया है. हमने मेघालय के आदिवासी लोगों को जमीन पर कानूनी अधिकार देने के लिए कानूनी प्रावधान किए हैं. राज्य भर के लोग जो इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. आगे जाकर हम आदिवासियों की मदद करने की योजना बना रहे हैं.

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