Skip to main content

तमिलनाडु: आदि द्रविड़ और आदिम जाति कल्याण विद्यालयों का विलय स्वीकार्य नहीं

Posted on April 4, 2023 - 1:24 pm by

आदि द्रविड़ और आदिवासी कल्याण (ADTW) विभाग द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों को स्कूल शिक्षा विभाग(DSE) के साथ विलय करने के निर्णय का विरोध किया जा रहा है. यह विरोध कार्यकर्ताओं, राजनेताओं और शिक्षा जगत के सदस्यों के एक समूह द्वारा किया जा रहा है. उन्होंने तमिलनाडु सरकार से अपील की है कि ADTW को DSE के साथ विलय करने के लिए आगे न बढ़े.

हाल ही में ‘अरिवु समोगम’ द्वारा ऑनलाइन और ऑफलाइन चर्चा आयोजित की गई थी. जिसमें इन स्कूलों को विलय करने के संबंध में चर्चा की गई थी. इसको लेकर तमिलनाडु सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए तमिलनाडु के बजट के हिस्से के रूप में घोषित किया गया था.

स्कूलों को विलय करने के कारणों को लेकर हस्ताक्षरकर्ता मानते हैं कि सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का अनुपालन करना चाहती है. उनके अनुसार, नीति में केवल सरकारी और निजी स्कूलों के अस्तित्व की परिकल्पना की गई थी. इसमें  विभिन्न प्रकार के सरकारी स्कूलों को शामिल नहीं किया गया है.

चर्चा में भाग लेने वाले अधिकांश विलय के खिलाफ

अरिवु समोगम के अध्यक्ष तमिल मुधलवन ने कहा कि चर्चा में भाग लेने वाले लगभग 300 व्यक्तियों में से अधिकांश विलय के खिलाफ थे. विलय के खिलाफ प्रमुख तर्कों में यह चिंता शामिल थी कि विलय से कम छात्रों वाले ADTW स्कूलों को बंद किया जा सकता है. राज्य भर में ADTW स्कूलों के पास संपतियां और बुनियादी ढांचा है.

उन्होंने कहा कि स्कूलों के विलय से इनमें से कई बुनियादी ढांचे को अन्य उद्देश्यों के लिए डायवर्ट किया जा सकता है. उन्होंने इस तर्क का खंडन किया कि इन स्कूलों के नामों में जाति पहचानकर्ता की मौजूदगी के कारण लांछन और अलगाव पैदा हुआ.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के तमिलनाडु सचिव के. बालाकृष्णन, शिक्षाविद् और अकादमिक वी. वसंती देवी और लेखक अज़गिया पेरियान उन कुछ लोगों में से थे, जो विलय के पक्ष में थे.

No Comments yet!

Your Email address will not be published.