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पीएम के कारण मिलेट्स ईयर 2023 के तौर पर मनाया जा रहा है – अर्जुन मुंडा

Posted on December 23, 2022 - 3:41 pm by

ये जंगलों में रहते हैं शिकार करते है, पेड़, फल-फूल, कंद-मूल के भरोसे रहते हैं. प्रधानमंत्री ने यूनाइटेड नेशन को लिख कर यह आग्रह किया था कि इस वर्ष को मोटे अनाज के रूप में मिलेट्स ईयर के रूप में मनाना चाहिए. यूनाइटेड नेशन ने उसकी स्वीकृति दी और यह वर्ष मिलेट्स ईयर के रूप में मनाया जा रहा है. यह मिलेट्स का उत्पादन करने वाले इन जंगलों में रहने वाले लोग हैं. आदिवासी मामलों में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने लोकसभा सदन में कही.

उन्होने आगे कहा कि इन जंगलों में रहने वाले लोगों की जीवन पद्धति मोटे अनाज के साथ जुड़ी हुई है. उनकी आवाज को समझने के लिए कई वर्ष लगे. एक सौ एकत्तीस करोड़ की आबादी में भी पांच हजार आबादी की आवाज भी यह सरकार सुनती है.

साल 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के तौर पर मनाया जाएगा

भारत मोटे अनाजों का सबसे बड़ा उत्पादक देश है. भारत में 40 फीसदी तक मिलेट्स का उत्पादन किया जाता है. संयुक्त राष्ट्र के द्वारा 2023 को इंटरनेशनल मिलेट्स ईयर के तौर पर मनाया जा रहा है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स दिवस के तौर मनाने के लिए प्रस्ताव किया था.

क्या है मिलेट्स और उनके पोषक तत्व

मिलेट्स छोटे आकार के बीज को कहा जाता है. इन बीज वाले अनाजों में मोटे दाने वाला अनाज (Major Millets) और छोटे दाने वाले अनाज (Minor millets) शामिल है. इसमें रागी (मड़ुआ), बाजरा, ज्वार, चेना, मूंग, कंगनी, कुटकी, कोदो और चावल आदि शामिल है. कैल्शियम, लोहा, जस्ता, फास्फोरस, मैंग्नीशियम, पोटेशियम, फाइबर, विटामिन बी-6, विटामिन-3, कैरोटिन, लेसितिण आदि पोषक तत्व इनमें मिलने वाले पोषक तत्व समृद्ध मात्रा में पाए जाते हैं.

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