Skip to main content

नागालैंड चुनाव: साठ साल बाद नागालैंड को मिल सकता है महिला विधायक

Posted on February 20, 2023 - 5:12 pm by

नागालैंड को राज्य का दर्जा मिले साठ साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक विधानसभा के लिए एक महिला का चुनाव नहीं हुआ है. आगामी 27 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में 183 उम्मीदवारों में से केवल चार महिलाएं मैदान में हैं. नागालैंड में विधान सभा सीटों की संख्या 60 है. जनगणना 2011 के अनुसार नागालैंड की आबादी 19.78 लाख है. जिसमें 13,09,651 मतदाता हैं. यहां पर 60 में 59 सीट आदिवासियों के लिए आरक्षित है. साल 2018 के विधानसभा चुनाव में NPF(नागा पीपल्स फ्रंट) को 26 सीट, NDPP को 18, BJP को 12, NPP  को 2 सीट और अन्य पार्टी महज 2 सीट ही जीत पायी थी. नागा पीपल्स फ्रंट के 26 सीट जीतने के बावजूद भी वह सरकार नहीं बना पायी. NDPP और BJP के गठबंधन में सरकार बनी. जिसमें नेफ्यु को मुख्यमंत्री बनाया गया. वहीं साल 2013 में गठबंधन में NDF को 38 सीट और BJP को 1 सीट मिली थी. इसके अलावा कांग्रेस को 8 सीट, NCP को 4 व अन्य पार्टियों को 9 सीटें प्राप्त हुई थी.

वर्तमान सीटों का गणित

सत्तारूढ़ एनडीपीपी 40 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, भाजपा 20 सीटों पर, कांग्रेस 23 सीटों पर जबकि एनपीएफ 22 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. लोक जन शक्ति (लोजपा-रामविलास) 15 सीटों पर, एनपीपी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी 12-12 सीटों पर तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) नौ सीटों पर, जनता दल (यूनाइटेड) सात सीटों पर, राष्ट्रीय जनता दल तीन और भाकपा एवं राइजिंग पीपुल्स पार्टी एक-एक सीट पर चुनाव लड़ रही है.

महिला विधायक और नागालैंड

साल 1977 में एक महिला रानो एम शाइजा ने पूर्व मुख्यमंत्री होकिशे सेमातो को हराकर लोकसभा की सदस्य बनी थीं. वर्ष 2022 में 45 साल बाद राज्य भारतीय जनता पार्टी की महिला विंग की अध्यक्ष एस फांगनोन कोन्याक सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सर्वसम्मत उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा के लिए चुनी गईं. नागालैंड में महिलाएं राष्ट्रीय औसत की तुलना में साक्षरता (राष्ट्रीय स्तर पर 64.63 फीसदी के मुकाबले 76.11 फीसदी) के साथ-साथ सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में कार्यबल जुड़ाव पर बेहतर प्रदर्शन करती हैं. वे नागरिक समाज में भी काफी प्रभाव रखते हैं, लेकिन यह अभी तक चुनावी राजनीति में उनकी बढ़ती उपस्थिति में परिवर्तित नहीं हुआ है.

प्रभावशाली नागा मदर्स एसोसिएशन (एनएमए) के संस्थापक सदस्य और महिलाओं के लिए राज्य आयोग के पहले अध्यक्ष सानो वामुजो ने कहती है कि नागा समाज पितृसत्तात्मक है और इसकी सामाजिक प्रथाओं और प्रथागत कानूनों को संविधान के अनुच्छेद 371ए के तहत संरक्षित किया गया है. परंपरागत रूप से नागा महिलाओं को निर्णय लेने वाली संस्थाओं में मुश्किल से ही शामिल किया जाता था. पुराने समय में महिलाओं को घर पर रहने बच्चों की देखभाल करने और घर के काम करने की जिम्मेदारी दी जाती थी. जबकि पुरुषों को काम से मुक्त रखा जाता था ताकि वे गाँव की रक्षा कर सकें. महिलाओं को निर्णय लेने में शामिल करने के बारे में कोई विचार नहीं था. हालांकि पुरुष विपरीत लिंग के खिलाफ नहीं थे.

उन्होने आगे कहा कि लेकिन बदलते समय और बेहतर शिक्षा के साथ समानता में वृद्धि हुई है. अस्सी वर्षीय बुजुर्ग ने राज्य विधायिका सहित निर्णय लेने वाले निकायों में महिलाओं की भागीदारी की पुरजोर वकालत की. नागालैंड की पहली महिला सांसद रानो एम शाइजा की बहन और पूर्व मुख्यमंत्री वामुजो फेसाओ की पत्नी सानो वामुजो नागालैंड के राजनीतिक परिदृश्य के लिए कोई अजनबी नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि महिलाओं को चुनाव में खड़े होकर लड़ना चाहिए. जब तक हम चुनाव नहीं लड़ते, हम विधानसभा में प्रवेश नहीं कर सकते. आगामी चुनावों के लिए चार महिला उम्मीदवारों पर वह उनकी जीत के लिए प्रार्थना कर रही हैं, भले ही किसी पार्टी से हो. इस बार सत्तारूढ़ नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (NDPP) दो महिला उम्मीदवारों को पश्चिमी अंगामी निर्वाचन क्षेत्र से सलहौतुओनुओ क्रूस और दीमापुर-तृतीय निर्वाचन क्षेत्र से हेकानी जाखलू से मैदान में उतार रही है. उसकी सहयोगी भाजपा अतोईजू से काहुली सेमा को मैदान में उतार रही है. कांग्रेस ने टेनिंग से रोजी थॉमसन को उम्मीदवार बनाया है.

चार महिलाओं के लिए चुनावी जंग इन चार महिला उम्मीदवारों के लिए लड़ाई आसान नहीं होगी. क्रूस स्वर्गीय केविसेखो क्रूस की पत्नी हैं. उनका मुकाबला निर्दलीय उम्मीदवार केनिझाखो नाखरो(56 वर्षीय) के साथ होगा. केविसेखो ने वर्ष 2018 में एनडीपीपी उम्मीदवार के रूप में हार गए थे. वह दो दशकों से अधिक समय से नागरिक समाज संगठनों में सक्रिय रूप से शामिल रही हैं और उन्होंने अपनी जनजाति के महिला निकाय अंगामिमियापफु मेचु क्रोथो का नेतृत्व किया और जनजाति के पुरुष-प्रधान शीर्ष संगठन में सलाहकार बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य किया.

वर्ष 2018 में नारी शक्ति पुरस्कार की प्राप्तकर्ता 48 वर्षीय जाखलू दो बच्चों की मां हैं और कानून की पृष्ठभूमि वाली सामाजिक उद्यमी हैं. उनका सामना एनडीपीपी के एक अन्य पूर्व विधायक एज़ेटो झिमोमी से होगा, जो लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. तीन अन्य पुरुष उम्मीदवार- कांग्रेस के वेतेत्सो लासुह और निर्दलीय काहुतो चिशी सुमी और लुन तुंगनुंग हैं.

वहीं थॉमसन(58 वर्षीय) दो दशकों से अधिक समय से कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए हैं. वह पांच पुरुष उम्मीदवारों के खिलाफ हैं, जिनमें दो बार के विधायक और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के उम्मीदवार नामरी न्चांग, ​​तारी जेलियांग, नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के झंडी दोमता और निर्दलीय उम्मीदवार तुमडा न्यूमे शामिल हैं.

बीजेपी उम्मीदवार काहुली सेमा अपने समुदाय में लोक निर्माण विभाग की पहली महिला इंजीनियर-इन-चीफ हैं, जिन्होंने चुनाव लड़ने के लिए सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली. सरकारी सेवा में 30 से अधिक वर्षों के साथ उनके पास पर्याप्त प्रशासनिक और अग्रणी अनुभव है. वह दो बार के सांसद पिक्टो शोहे से भी भिड़ेंगी. एक अन्य एनडीपीपी विधायक जिन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया. एनसीपी के टिकट पर लड़ रहे हैं.

No Comments yet!

Your Email address will not be published.