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एससी, एसटी पर अत्याचार के मामले को सूचीबद्ध करने के लिए राष्ट्रीय पोर्टल बने – संसदीय समिति

Posted on March 28, 2023 - 11:06 am by

देशभर में लगभग हर रोज दलित और आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार के मामले सामने आते हैं. इन वर्गों के खिलाफ दर्ज अपराधों की संख्या में वृद्धि हुई है. बावजूद इसके कि साल 1989 में एसएसी/एसटी एक्ट बनाया गया था.

इसको लेकर भाजपा सांसद किरीट प्रेमजीभाई सोलंकी की अध्यक्षता वाली एससी और एसटी के कल्याण संबंधी स्थायी समिति ने एक रिपोर्ट पेश की. जिसमें एससी और एसटी समुदायों के खिलाफ अत्याचार के सभी मामलों को सूचीबद्ध करने के लिए सरकार से एक राष्ट्रीय पोर्टल तैयार करने को कहा है.

इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में समिति ने राष्ट्रिय अनुसूचित जनजाति आयोग की वित्तीय स्वतंत्रता पर भी ज़ोर दिया. समिति ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान करने के लिए वित्त मंत्रालय से समन्वय करने का प्रयास करने को कहा है.

दलित ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स नेटवर्क का खुलासा

हाल ही में 1,000 से अधिक दलितों के गठबंधन, दलित ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स नेटवर्क ने एक रिपोर्ट जारी कि थी. इसके मुताबिक साल 1991 से 2021 तक यानी तीस साल की अवधि में, अनुसूचित जाति समुदायों के खिलाफ अपराधों की संख्या में 177.6% की वृद्धि हुई है. वहीं इसी अवधी में एसटी समुदायों के खिलाफ अपराधों में 111.2% की वृद्धि हुई है.

रिपोर्ट के मुताबिक देश में इन दोनों वर्गों की जनसंख्या की तुलना में ये अपराध तेज़ी से बढ़े है.

बता दें, ये रिपोर्ट आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना सहित देश 15 राज्यों से एकत्रित आंकड़ों पर बनाई गई है. राज्यों की बात करें तो इन 30 सालों में आदिवासियों के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए. यहां 28.2 प्रतिशत मामले दर्ज हुए.

इसके बाद राजस्थान में 20.22%, ओडिशा में 8.50%, महाराष्ट्र में 7.23% और तेलंगाना में 6.34% प्रतिशत मामले दर्ज किए गए.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इन मामलों में पुलिस ने चार्जशीट भी देरी से दायर की. sc st अधिनियम के तहत FIR दर्ज होने के 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दायर की जानी चाहिए. लेकिन अक्सर ऐसा होता नहीं है.

रिपोर्ट के मुताबिक 2016 से 2020 के बीच लगभग 46.8% अत्याचार के मामलों में चार्जशीट 60 दिनों के बाद दायर की गई. इस मामले में तेलंगाना का सबसे खराब रिकॉर्ड है. चार्जशीट दाखिल करने में लगने वाला औसत समय 100 दिन या साढ़े महीने था.

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