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ट्राइबल रिसर्च की योजना बनाने के लिए NCST ने 104 विश्वविद्यालयों को लिखा पत्र

Posted on January 21, 2023 - 12:58 pm by

NCST ने 104 विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों के प्रशासन से पुछा है कि उन्होने संबंधित संस्थानों में जनजातीय अधिकारों(Tribal Rights), जनजातीय पहचान(Tribal Identity) और जनजातीय विकास(Tribal Development) के अध्ययन और कार्य  को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाएं हैं.

इन विश्वविद्यालयों में कुछ IIT, IIM और NIT के अलावा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू), असम विश्वविद्यालय, मुंबई विश्वविद्यालय, बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय(गुजरात), ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय आदि शामिल हैं.

125 विश्वविद्यालय में हुआ था आयोजन

यह कदम NCST द्वारा एक साल के लंबे अभियान के बाद आया है, जिसमें केंद्र सरकार के “आजादी का अमृत महोत्सव” अभियान के अनुरूप आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत के 125 विश्वविद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित किए हैं.

नवंबर 2022 में दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में कार्यक्रमों की श्रृंखला समाप्त हुई, जिसमें 70 कुलपतियों, TRI (Tribal Research Institute) के निदेशकों और सैकड़ों मानवविज्ञानी, समाजशास्त्रियों और अन्य शोधकर्ताओं ने भाग लिया. इस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने समापन टिप्पणी करते हुए घोषणा की, कि आदिवासी अनुसंधान पर इस तरह की चर्चाओं को एक प्रारंभिक बिंदु के रूप में काम करना चाहिए.

इसके तुरंत बाद दिल्ली विश्वविद्यालय 12 जनवरी को जनजातीय अध्ययन केंद्र स्थापित करने की संभावना की जांच करने के लिए एक समिति के गठन की घोषणा करके कार्यशाला में आयोजित चर्चाओं पर कार्रवाई करने वाला पहला बन गया.

डीयू के भारती कॉलेज की डॉ. लुके कुमारी (11 सदस्यीय समिति का हिस्सा) ने कहा: “जनजातीय अध्ययन केंद्र जल्द ही डीयू के अध्यादेश 20 के तहत खोला जाएगा. वी-सी ने इसे हर साल ₹50 लाख की वार्षिक धनराशि देने पर सहमति व्यक्त की है. हम पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने पर काम कर रहे हैं और इसमें आदिवासी ज्ञान से संबंधित शोध पर ध्यान दिया जाएगा.

अधिकारियों ने कहा कि अब  NCST ने उन सभी 104 विश्वविद्यालयों और संस्थानों को लिखा है, जहां 2021 और 2022 में छोटे कार्यक्रम आयोजित किए गए थे और जिन्होंने नवंबर 2022 में कार्यशाला में भाग लिया था.

औपनिवेशिक सरकारों के रचनाओं पर है निर्भर

उन्होंने कहा कि आयोग ने प्रशासन से जनजातीय अनुसंधान पर पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में पूछा है और उनसे इस दिशा में योजनाओं के लिए एक समयरेखा प्रदान करने के लिए भी कहा है, यदि उनके पास कोई है.

यह उन समुदायों के सदस्यों द्वारा भारत में जनजातीय और आदिवासी संस्कृतियों और समाजों के अधिक प्रलेखन के लिए NCST के एक ठोस प्रयास को ध्यान में रखते हुए है. तर्क यह है कि इस विषय पर मौजूदा साहित्य औपनिवेशिक सरकारों द्वारा बनाई गई रचनाओं पर बहुत अधिक निर्भर है.

NCST के अध्यक्ष हर्ष चौहान ने नवंबर 2022 में कार्यशाला के समापन के दौरान कहा था कि आयोग सरकार को कार्यशाला से प्राप्त जानकारी पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का इरादा रखता है. ताकि वह भी भारत में ट्राइबल रिसर्च का एक व्यापक निकाय बनाने के अपने प्रयासों को निर्देशित कर सके.

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