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ओडिशा में एनजीओ को मिले 1 अरब रुपए, आदिवासियों का करना था विकास

Posted on February 18, 2023 - 12:44 pm by
संसद में आदिवासी विशेष

विजय उरांव, ट्राइबल खबर के लिए

आदिवासी क्षेत्रों में कई तरह के गैर सरकारी संगठन चलाए जाते हैं. यह गैर सरकारी संगठन जनजातीय आबादी वाले क्षेत्रों में तुलनात्मक रूप से सेवा की कमी को देखते हुए NGOs के द्वारा कमियों को पूरा करने के लिए सरकार का एक प्रयास है.

इन एनजीओं पर सरकार कितना पैसा खर्च करती है. इन गैर सरकारी संगठनों की सूची क्या है और इसकी निगरानी कौन करते हैं, इसके अलावा खराब प्रदर्शन करने वाले NGOs के नामों की खुलासे करने आदि सवाल क्योंझर से सांसद कुमारी चंद्राणी मूर्मु ने बजट सत्र के दौरान जनजातीय कार्य मंत्रालय से पूछे थे. इस पर जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 5 वर्ष के अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए कार्यरत स्वैच्छिक संगठनों को सहायता अनुदान के तहत पिछले पांच वर्षों में केंद्र सरकार ने वर्ष 2017-22 तक ओडिशा के गैर सरकारी संगठनों को 1 अरब 24 करोड़ 9 लाख 17 हजार 8 सौ दो रू. अनुदान राशि जारी कर चुकी है.

जिसमें वित्तीय वर्ष 2017-18 में 22 करोड़ 71 लाख 51 हजार एक सौ बीस रू, साल 2018-19 में 32 करोड़ 36 लाख 41 हजार पांच सौ अंठावन रू, वहीं साल 2019-20 में 29 करोड़ 39 लाख 97 हजार पांच सौ सत्तर रू. इसके अलावा साल 2020-21 में 15 करोड़ 36 लाख 81 हजार 894 रू. तथा साल 2021-22 में 24 करोड़ 24 लाख 81 हजार छ सौ साठ रू शामिल है.

क्योंझर के गैर सरकारी संठगन पर खर्च

वहीं जनजातीय मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार ओडिशा के क्योंझर जिले में शैक्षिक परिसर परियोजना के लिए “प्रकल्प” नामक गैर सरकारी संगठन को वर्ष 2018 से 2022 तक 3 करोड़ 32 लाख 51 हजार आठ सौ अंठावन रू. अनुदान राशि जारी किए थे. जिसमें साल 2018-19 में 1 करोड़ 43 लाख 33 हजार दो सौ अस्सी रू, वहीं 2019-20 में 1 करोड़ 2 लाख 16 हजार नौ सौ पांच रू. और साल 2021-22 में 87 लाख 1 हजार छह सौ तिहत्तर रू शामिल है.

एनजीओ की कैसे होती है निगरानी

बता दें कि अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए कार्यरत स्वैच्छिक संगठनों को सहायता अनुदान के तहत निधि जारी की जाती है. निधि जारी कर रहे गैर सरकारी संगठनों और स्वैच्छिक संगठनों को जिला प्राधिकारियों द्वारा वार्षिक निरीक्षण, राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा संवीक्षा और सिफारिश की जाती है, वहीं गैर-सरकारी संगठनों/स्वैच्छिक संगठनों द्वारा वार्षिक ऑडिट खातों उपयोग प्रमाण पत्र को प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है. जनजातीय कार्य मंत्रालय के द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है. इसके अलावा रसीद व्यय अग्रिम और हस्तांतरण (REAT) मॉड्युल का उपयोग करके पीएफएमएस पर सहायता प्राप्त गैर सरकारी संगठनों द्वारा व्यय की फाइलिंग दर्ज कराना होता है और मंत्रालय द्वारा नियुक्त एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा तृतीय पक्ष की निगरानी का भी प्रावधान है इसके बाद संतोषजनक कार्य दर्शाने और राज्य सरकार के सिफारिश के बाद ही निधि जारी की जाती है.

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