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आदिवासियों को आरक्षण नहीं, अधिकार दी जाए: उलाका

Posted on December 16, 2022 - 3:44 pm by

सरकार जाने अनजाने आदिवासियों का शोषण ही कर रही है. उनके प्राकृतिक रहने वाले क्षेत्रों में ढांचागत विकास, परियोजना लागत कम करने की कोशिश मात्र है. इससे आदिवासी समुदायों को कहीं कोई फायदा नहीं हुआ है. बल्कि उनके विस्थापन का संकट खड़ा हो गया है. उक्त बातें कांग्रेस सांसद सप्तगिरी शंकर उलाका ने संसद में कही.

दरअसल, लोकसभा ने हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने वाले संविधान आदेश विधेयक 2022 पर विचार आरंभ किया गया था. जिसमें सप्तगिरि शंकर उलाका ने कहा कि आदिवासियों को आरक्षण नहीं बल्कि अधिकार दिया जाए. हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में रहने वाले हाटी समुदाय के करीब एक लाख 60 हजार लोगों पर बात की जा रही थी.

इस विधेयक को सदन में केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा पारित करने के लिए पेश किया गया था. जिसके बाद कांग्रेस के सप्तगिरि शंकर उलाका ने इस पर चर्चा आरंभ कर दिया.

सरकार की मंशा आदिवासियों का दोहन करना

भारतमाला परियोजना के ओडिशा में कार्यान्वयन का हवाला देते हुए उलाका ने कहा कि सरकार केवल उन्हीं आदिवासी क्षेत्रों में विकास की बात कर रही है, जहां प्राकृतिक संसाधन है. सरकार की मंशा उनका दोहन करना है. उन्होंने कहा कि किसी समुदाय विशेष को राज्य के आधार पर दर्जा देने से आदिवासी समाज का क्या भला होगा. सरकार को चाहिए कि एक समग्र विधेयक लाए. जिसमें एक जिले में अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त सभी समुदायों को पूरे देश में एक समान जनजातीय दर्जा दिया जाए.

18 प्रतिशत जीएसटी पर जताई आपत्ति

उलाका ने तेंदूपत्ता चुनने वाले आदिवासियों पर इसके लिए 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाने पर सख्त आपत्ति जताया है. उनका कहना है कि आदिवासियों को आरक्षण नहीं बल्कि अधिकार दिया जाए. साथ ही  उन्होंने संसद में सभी 48 जनजातीय सांसदों को एक साथ लेकर आदिवासी समाज के कल्याण के लिए यथार्थवादी कदम उठाए जाने का सुझाव दिया.

भारतीय जनता पार्टी के सुरेश कुमार कश्यप ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले हाटी समुदाय के लोग उत्तराखंड के जौनसार बाबर क्षेत्र में रहते हैं और उन्हें तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जनजाति का दर्जा दे दिया था. लेकिन हिमालय प्रदेश में यह बहुत पुरानी मांग थी. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कुल 70 लाख की आबादी में 3.92 लाख अनुसूचित जनजाति के लोग हैं. हाटी समुदाय के लोगों को मिला कर यह संख्या 5.52 लाख हो जाएगी.

पर्यटन विकास से स्थानीय अर्थतंत्र बढ़ोत्तरी

तृणमूल कांग्रेस की अपरूपा पोद्दार ने विधेयक का स्वागत करते हुए कहा, “देर आए दुरुस्त आए. आदिवासी क्षेत्रों में पर्यटन का विकास होने से स्थानीय अर्थतंत्र भी विकसित होता है. उन्होंने देश में सरकारी नौकरियों में जनजातीय लोगों के आरक्षित पदों पर रिक्तियों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की और पश्चिम बंगाल के 238 चाय बागानों में काम करने वाले झारखंड के जनजातीय श्रमिकों को भविष्य निधि नहीं मिलने की ओर ध्यान दिलाया.”

शिवसेना के अरविंद सावंत ने कहा कि आदिवासी समुदाय के लोगों को उनके क्षेत्रों में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराए जाने पर ध्यान देना चाहिए. शिक्षा के लिए उनके क्षेत्र में अच्छे स्कूल और चिकित्सालय खोलने चाहिए.

फोटो : प्रतिकात्मक

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