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मध्य प्रदेश: रोड नहीं, 10 किमी खाट पर ले जाते हैं मरीज

Posted on October 18, 2022 - 12:10 pm by

मध्य प्रदेश सरकार भले ही विकास के दावे करती रही हो. सतना जिले के उचेहरा क्षेत्र के धौसड़ गांव रोड नहीं है. आज भी आदिवासियों को गांव के बीमार लोगों को खाट पर रख इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ता है. एक हजार की आबादी वाले आदिवासी धौंसड में आज भी अगर कोई बीमार हो जाता है, तो खाट पर मरीज को उबड़-खाबड़ कीचड़ भरे रास्ते से होकर पिपरिया गांव में इलाज के लिए ले जाते हैं। वहां भी इलाज की सरकारी सुविधा नहीं होने से प्राइवेट चिकित्सक से इलाज कराते हैं।

ईलाज से पहले ही हो जाती है मौत

मरीज की हालत ज़्यादा नाजुक होने पर बाहर ईलाज पहले ही मरीज दम तोड़ देता है. धौंसड़ गांव के इस कच्चे रास्ते को अगर प्रशासन ठीक से चलने लायक ही बना दे. तो जो अभी तीन पंचायत को पार कर 10 किलोमीटर की दूरी तय कर पिपरिया गांव इलाज कराने यहां के लोगों को जाना पड़ता है. वह समस्या हल हो सकती है. लंबे समय से धौंसड गांव की जनता अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से इस ओर ध्यान देने की बात करती आ रही है, लेकिन किसी ने इन ग्रामीणों की आवाज पर अब तक ध्यान नहीं दिया.

रोजाना जीवन भी आसान नहीं

धौंसड गांव के लोगों को इलाज के अलावा रोजाना का सामान भी लेना होता है. तीन पंचायत पटीहट, गढौत और तुषगवां को पार कर अपनी पंचायत पिपरिया जाना होता है.  क्योंकि आस पास की पंचायतों में एक बड़ा बाजार पिपरिया ही है.  जहां उपचार से लेकर गृहस्थी का जरूरी सभी सामान सहज मिल जाता है.

धौंसड से पिपरिया के बीच की कच्चे रास्ते से दूरी मात्र एक किलोमीटर है। सही रास्ता न होने से यहां के लोग 10 किलोमीटर का चक्कर लगाकर अपनी पंचायत पिपरिया पहुंचते हैं, अब देखना होगा कि इन ग्रामीणों की समस्या का हल आखिरकार कब होगा।

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