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सभी धर्मांतरण अवैध नहीं हैं: सुप्रीम कोर्ट

Posted on January 5, 2023 - 12:54 pm by

सुप्रीम कोर्ट ने 3 दिसंबर को उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार की उस याचिका पर नोटिस जारी किया. जिसमें जिला मजिस्ट्रेट को सूचित किए बिना शादी करने वाले अंतर्धार्मिक जोड़ों पर मुकदमा चलाने से रोक लगाई गई थी. जस्टिस एम.आर. शाह और सी.टी. रविकुमार ने सुनवाई के दौरान कहा कि सभी धर्मांतरण को अवैध नहीं कहा जा सकता है.

शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई सात फरवरी को निर्धारित की.

शादी या धर्मांतरण पर कोई रोक नहीं

राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर अवैध धर्मांतरण के लिए शादी का इस्तेमाल किया जाता है, तो वह आंख नहीं मूंद सकती है और कहा कि शादी या धर्मांतरण पर कोई रोक नहीं है, लेकिन इसके लिए केवल जिलाधिकारी को सूचित करना आवश्यक है. मेहता ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने की मांग की, हालांकि शीर्ष अदालत ने कोई निर्देश पारित करने से इनकार कर दिया.

मध्य प्रदेश सरकार का तर्क

राज्य सरकार ने अपनी दलील में तर्क दिया कि उच्च न्यायालय के आदेश ने धारा 10 (1) को मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 की धारा 10 (2) के साथ मिला दिया है.

इसमें आगे कहा गया है कि जो प्रावधान धर्मांतरण के इच्छुक नागरिक पर लागू होता है, वह धारा 10(1) है और इस प्रावधान के उल्लंघन का कोई दंडात्मक परिणाम नहीं है और कोई मुकदमा नहीं चलाया जाता है.

राज्य सरकार ने कहा कि यह धारा 10 (2) है, जिसके दंडात्मक परिणाम हैं, जो एक पुजारी या व्यक्ति पर लागू होता है, जो सामूहिक धर्मांतरण द्वारा दूसरों को धर्मांतरित करना चाहता है. इसमें कहा गया है कि धारा 10 (2) की वैधता को किसी भी मौलिक अधिकार के उल्लंघन के रूप में नहीं परखा जा सकता, क्योंकि दूसरों को परिवर्तित करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है.

धर्मांतरण से पूर्व सूचना देना होगा

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने नवंबर 2022 में अपने फैसले में  राज्य सरकार को वयस्क नागरिकों पर मुकदमा चलाने से रोक दिया था. अगर वे अपनी इच्छा से विवाह करते हैं और मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम (एमपीएफआरए), 2021 की धारा 10 का उल्लंघन करते हैं.

प्रावधान के अनुसार धर्मांतरण करने का इरादा रखने वाले व्यक्तियों और धर्मांतरण करने वाले पुजारी को अपने इरादे के बारे में 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचित करना होगा. उच्च न्यायालय ने अधिनियम की धारा 10 को प्रथम दृष्टया में असंवैधानिक पाया था. उच्च न्यायालय ने कहा था, अगले आदेश तक प्रतिवादी वयस्क नागरिकों पर मुकदमा नहीं चलाएगा, यदि वे अपनी इच्छा से विवाह करते हैं और अधिनियम 21 की धारा 10 के उल्लंघन के लिए कठोर कार्रवाई नहीं करेंगे.

देश में मध्य प्रदेश ही नहीं बीजेपी शासित कई राज्यों में धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के लिए क़ानून बनाए गए हैं. संघ परिवार और बीजेपी लंबे समय से लव जिहाद को एक राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश में है.

आदिवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण

देश के आदिवासी इलाक़ों में भी धर्मांतरण को बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है. मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज चौहान आदिवासियों से जुड़े अपने भाषणों में धर्म परिवर्तन और लव जिहाद को मुद्दा बना रहे हैं. उधर छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी और आरएसएस से जुड़े संगठन इस मुद्दे को उछालने में कामयाब रहे हैं.

हाल ही में छत्तीसगढ़ के नारायणपुर और बस्तर के कुछ और इलाक़ों में धर्म परिवर्तन कर ईसाई बने आदिवासियों के साथ मार-पीट की घटनाएँ हुई थीं. उसके बाद भीड़ ने कुछ चर्चों को निशाना बनाया था. इसके अलावा जनजातीय रक्षा मंच के द्वारा धर्मांतरित आदिवासियों के आरक्षण खत्म करने का आंदोलन चलाया जा रहा है. यह भी धर्मांतरण आदिवासियों की घर वापसी के लिए जाने जाते हैं. झारखंड में इस तरह की गतिविधियां देखी जा रही है. बता दें कि झारखंड में भी धर्मांतरण कानून बनाया जा चुका है.

इस पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला बेहद अहम होगा. क्योंकि यह केवल क़ानूनी दांव पेंच का मामला नहीं है, बल्कि देश के सामाजिक ताने-बाने का मामला है. उसमें भी आदिवासी समाज का वह तबका है जो निशाने पर है.

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