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गर्भवती महिला को कपड़े से बांधकर 3 किमी तक पैदल चले लोग

Posted on December 12, 2022 - 10:54 am by

केरल के तिरूवनंतपुरम में प्रसव पीड़ा से तड़प रही कुरुम्बा जनजाति की एक आदिवासी गर्भवती महिला को लेने के लिए कई घंटों तक कोई एंबुलेंस नहीं आई. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और गर्भवती महिला के परिजनों ने समय बर्बाद न करते हुए उसे कपड़े के जरिए बांधकर तीन किलोमीटर तक पैदल चले.

क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार सुमति मुरूकन नाम की महिला को रविवार को देर रात 12.45 बजे प्रसव पीड़ा हुई. लेकिन उसे अस्पताल में भर्ती कराने के लिए कोई एंबुलेंस या अन्य वाहन उपलब्ध नहीं था.

सुमति के परिवार ने पुथूर के आदिवासी अस्पताल से संपर्क किया और नर्स प्रिया जॉय ने एंबुलेंस जल्द उपलब्ध होने का आश्वासन दिया. कई कॉल के बाद एक एंबुलेंस गर्भवती महिला को लाने को तैयार हुई. लेकिन वह उसके आवास से केवल 3 किमी की दूरी तक ही पहुंच सकी.

कपड़े के जरिए बांधकर तीन किलोमिटर चले

बता दें कि कडुक्कुमन्ना आदिवासी गांव भवानी नदी पर लटके पुल के पार दूसरी ओर है. इस पुल से कोई वाहन नहीं जाता है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और गर्भवती महिला के परिजनों ने समय बर्बाद न करते हुए उसे कपड़े के जरिए बांधकर तीन किलोमीटर तक पैदल चले. इस क्षेत्र में हाथी और तेंदुए जैसे जंगली जानवरों को अक्सर देखा जाता है. यह भी एक कारण है कि लोग इस इलाके में वाहन लाने से डरते हैं.

सुमति ने एक बच्चे को जन्म दिया

अंतत: गर्भवती महिला सुमति मुरूकन को अनवयल से अस्पताल ले जाया गया जहां उसने बच्चे को जन्म दिया.

कांग्रेस नेता ने घटना को शर्मनाक बताया

कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने घटना को शर्मनाक बताते हुए कहा कि यह केरल के लिए शर्मनाक है कि एक गर्भवती आदिवासी महिला को अट्टापदी के अस्पताल में एक कपड़े पर लादकर ले जाया गया. उन्होने सरकार से कहा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाई की जाए.

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