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प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन योजना; एमपी में आबादी डेढ़ करोड़, लाभुक मात्र 370 

Posted on February 16, 2023 - 10:14 am by
संसद में आदिवासी विशेष

विजय उरांव, ट्राइबल खबर के लिए

आदिवासियों के समुचित विकास के लिए केंद्र सरकार प्रयासरत दिख रही है. यही वजह है कि कई योजनाएं हाल के वर्षों में शुरू की गई है. लेकिन इन योजनाओं को धरातल पर उतारने में सिस्टम की दिलचस्पी बिल्कुल सुस्त दिखाई पड़ रही है.

जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन योजना शुरू की गई है. जिसके तहत राज्य सरकारों को अधिसूचित लघु वन उपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. ताकि वह युवाओ सहित सामान्यत: अनुसूचित जनजातियों की आजीविका को सुरक्षित कर सकें.

इस योजना के तहत एमएफपी की खरीद के लिए विभिन्न राज्य सरकारों को साल 2013-14 में  करीब 319 करोड़ रू. जारी किए गए थे. इस योजना के तहत पात्र जनजातीय युवाओं को उनके स्वयं के रोजगार के लिए 50 लाख तक के बैंक ऋण से वित पोषित किया जाता है. सरकार 5 फीसदी त्रैमासिक ब्याज परिदान और ऋण गारंटी प्रदान करता है.

मध्यप्रदेश में इसका हाल देखिये. यहां ‘भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना’ चलाई जा रही है. लेकिन बीते दो सालों में इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2021-22 के दौरान लाभार्थियों की संख्या मात्र 201 है.

लोकसभा के बजट सत्र के दौरान मध्यप्रदेश के ग्वालियर से लोकसभा सांसद विवेक नारायण शेजवलकर ने सरकार से जानना चाहा कि आदिवासियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं में कितना बजट पास किया गया है और उन योजनाओं का लाभ कितनें लोगों को दिया जा रहा है. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि मध्यप्रदेश के जनजातीय वन क्षेत्रों में रहनेवाले युवाओं के लिए शिक्षा के साथ कमाई के लिए चलाई जा रही योजनाएं कौन सी हैं और उससे कितने लोगों को लाभ मिला है.

इसी सवाल के जवाब में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने बताया है कि ‘टंट्या मामा आर्थिक कल्याण योजना’ के तहत जनजातीय युवाओं को उनके स्वरोजगार के लिए 10 हजार से एक लाख रूपये तक ऋण दिए जाते हैं. सरकार 7 फीसदी त्रैमासिक ब्याज परिदान (सबवेंशन) और ऋण गारंटी प्रदान करती है. इस योजना के तहत साल 2020-21 एवं 2021-22 के दौरान लाभार्थियों की संख्या मात्र  169 है.

दोनों योजनाओं को मिला दें तो लाभुकों की संख्या 370 तक पहुंची है. आदिवासी मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश में आदिवासियों की जनसंख्या 1 करोड़ 53 लाख 16 हजार हैं. यानी राज्य की जनसंख्या का 21.10 प्रतिशत आदिवासी हैं. ऐसे में साफ देखा जा सकता है कि जमीन पर कितने आदिवासियों को इन योजनाओं के बारे में जानकारी दी जा रही है, और इसका उंगली पर गिने जाने लायक लोग ही लाभ ले पा रहे हैं.

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