Skip to main content

सरना धर्म कोड की मांग को लेकर कोलकाता में हुई जनसभा,  जानिए आगामी जनसभा किन क्षेत्रों में होगी?

Posted on October 1, 2022 - 9:43 am by
सरना धर्म कोड

नेहा बेदिया

सरना धर्म कोड की मांग को लेकर आए दिन कई जगहों में विभिन्न आदिवासी संगठनों की अधिवेशन देखने को मिल रहा है। इसी मांग के तहत कोलकाता के रानी रासमनी रोड (एसप्लेनेड) में शुक्रवार 30 सितंबर को एक जनसभा हुई। इस जनसभा की अध्यक्षता आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने की। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा मौजूद थे। 

दिल्ली में मनेगा सरना धर्म कोड दिवस

दरअसल इस जनसभा के आधार पर सरना धर्म कोड की मांग को सफल बनाने हेतु और किन अलग-अलग क्षेत्रों में आगामी जनसभाएं करने का निर्णय लिया गया है। चार नवंबर को असम की राजधानी गुवाहाटी में धर्मकोड जनसभा तथा 11 नवंबर को दिल्ली में संसद मार्च की जाएगी तथा सरना धर्म कोड दिवस मनाया जाएगा, बता दे कि 11 नवंबर 2020 को झारखंड विधानसभा में विशेष सत्र बुलाकर सरना धर्म कोड पारित किया गया था। इसके साथ घोषणा की गई कि यदि केंद्र सरकार 20 नवंबर तक सरना धर्म कोड को मान्यता प्रदान करती है, तो 30 नवंबर को पांच राज्यों में रेलरोड चक्का जाम किया जाएगा। इसके बाद 26 फरवरी 2023 को रांची स्थित मोराबादी मैदान में सरना धर्म जनसभा की जाएगी।  

पांच राज्यों के आदिवासी सभा में शामिल हुए थे

झारखंड, बंगाल, बिहार, ओड़िशा और असम आदि पांच राज्यों से शामिल बड़ी संख्या में आए लोगों के समक्ष तय किया गया कि सालखन मुर्मू के नेतृत्व में आदिवासी सेंगेल अभियान और धर्मगुरु बंधन तिग्गा के नेतृत्व में राष्ट्रीय सरना धर्म रक्षा अभियान मिलकर सरना धर्म कोड की मान्यता के लिए संगठित आंदोलन करेंगे।

सालखन मुर्मू ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विश्वास जताते हुए कहा कि उन्होंने सरना धर्म कोड की मान्यता, सम, अंडमान के झारखंडी आदिवासियों को एसटी बनाने, संताली को प्रथम राजभाषा बनाने, झारखंड प्रदेश के पुनर्निर्माण और आदिवासी स्वशासन व्यवस्था में सुधार की विषयों के बारे में भी बताया। उन्होंने आगे कहा कि इस जनसभा से संताल आदिवासी और उरांव आदिवासियों के गठबंधन से सफलता की ओर बढ़ने का माहौल बना है। उन्होंने पश्चिम बंगाल, झारखंड व ओडिशा के सरकार को कुरमी, महतो को आदिवासी बनाने के मामले पर सवाल उठाया और उन्हें आदिवासी विरोधी भी बताया। वे इस बात से नाखुश दिखाई दिए।

मौके पर सुमित्रा मुर्मू, सोहन हेंब्रम, देवनारायण मुर्मू, नरेंद्र हेंब्रम, लक्ष्मीनारायण किस्कु वैद्यनाथ हांसदा, तिलका मुर्मू आदि शामिल थे। विशिष्ट अतिथि डॉ.करमा उरांव व विद्यासागर केरकेट्टा और जादवपुर विवि संताली स्टूडेंट्स वेलफेयर एंड कल्चरल एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्वनाथ हांसदा मौजूद थे।

No Comments yet!

Your Email address will not be published.