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राजस्थान: सीजेपी ने आदिवासी लिंचिंग के मामले में एनसीएसटी का रुख किया

Posted on November 25, 2022 - 5:25 pm by

सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस ने किशनलाल भील(46) के परिवार के लिए सुरक्षा की मांग करते हुए एनसीएसटी में एक शिकायत दर्ज की है.  जिसे कुआं का पानी लेने पर लिंचिंग कर दी गई थी. सीजेपी ने शिकायत में अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.  जो अभी भी जेल से बाहर हैं. आरोपी के परिवारों के द्वारा किशनलाल भील के परिवार केस वापस लेने के लिए परेशान किया जा रहा है. इसलिए सीजेपी ने पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने की मांग की है.

सीजेपी ने शिकायत में न्याय के लिए गहन जांच करने की भी मांग की है. इसके साथ ही पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा देने की भी मांग की है. सीजेपी ने यह भी ध्यान दिलाया है कि सबूत सही एकत्र नहीं होने से पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल पाएगा. इसलिए एनसीएसटी आयोग न्याय दिलाने में रूचि ले.

सीजेपी की शिकायत में आगे कहा है कि हम जानते हैं कि एक अपराध पहले ही दर्ज किया जा चुका है और बस आग्रह कर रहे हैं कि मौजूदा कानून के तहत पीड़ित परिवार को और सुरक्षा भी प्रदान की जाए. जिसमें एसटीएससी एक्ट के धारा 15 ए के तहत पीड़ितों, उनके आश्रितों और गवाहों को किसी भी प्रकार की धमकी या जबरदस्ती या प्रलोभन या हिंसा या धमकी के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है

क्या है पूरा मामला

दिन 6 नवंबर को  राजस्थान के जोधपुर जिले के सूरसागर में एक वारदात हुई थी. जिसमें  45 वर्षीय किशनलाल भील को ट्यूबवेल से पानी निकालने पर लिंचिग की गई थी. पुलिस के अनुसार  मृतक के परिवार ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने भोमियाजी की घाटी के मृत व्यक्ति किशनलाल भील (46) को भी जातिसूचक गालियां दीं.

मृतक के भाई अशोक ने दावा किया कि आरोपियों ने पीड़िता के परिवार को उसे अस्पताल ले जाने से रोका. भाई के अनुसार  पुलिस के आने तक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को अस्पताल नहीं ले जाया गया.  जिसके कारण  किशनलाल की जान चली गई.

पुलिस ने अब तक तीन लोगों शकील,  नासिर और बबलू को गिरफ्तार किया है. उन पर एससीएसटी एक्ट और आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया है. अन्य अपराधियों की तलाश अभी भी जारी है.

आदिवासियों के खिलाफ एक ही पैटर्न में हुई अत्याचार को लेकर सीजेपी द्वारा की गई शिकायतें

आदिवासी विरोधी हिंसा लगातार बढ़ रहा है. जिसमें एनसीआरबी के रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 के अंत तक अनुसूचित जाति के खिलाफ अत्याचार के कुल 70,818 मामले और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ 12,159 मामले जांच के लिए लंबित हैं.

वर्ष 2020 में सीजेपी ने राजाजी नेशनल पार्क, देहरादून में खानाबदोश जनजाति वन गुर्जरों के साथ हो रहे अन्याय के मामले में एनसीएसटी से शिकायत की. जिसमें  16 जून, 2020 से वन अधिकारी राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के अशारोडी वन में रहने वाले समुदाय को परेशान कर रहे थे, जिसके परिणामस्वरूप समुदाय के कई सदस्य  एक विशेष परिवार को गिरफ्तार किया गया और कुछ अन्य घायल हो गए.

जुलाई 2020 में, दुधवा टाइगर रिजर्व, लखीमपुर खीरी, यूपी के कजरिया गांव के थारू आदिवासियों पर वन अधिकारियों और स्थानीय पुलिस ने हमला किया. यहां तक ​​कि हवा में गोलियां भी चलाईं. महिलाओं से छेड़छाड़ की और कुछ युवाओं को पीटा. सीजेपी  और ऑल इंडिया यूनियन ऑफ फॉरेस्ट वर्किंग पीपल (AIUFWP) ने तुरंत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को लिखा.  जिसने उत्तर प्रदेश के वन विभाग से एक कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) मांगी है.

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