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राजस्थान: आदिवासियों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे थे अवैध क्लीनिक और हॉस्पिटल

Posted on October 30, 2022 - 10:13 am by

उदयपुर के उपतहसीलदार गोगुन्दा क्षेत्र के मेरपुर उप तहसील के देवला में  पहुंची. लंबे समय से चल रहे अवैध अस्पताल एवं चिकित्सा का निरीक्षण किया. इसमें कई अनियमितताओं का खुलासा हुआ और अस्पताल व मेडिकल को जब्त कर लिया गया.

एसडीएम के मौखिक निर्देश पर पुलिस टीम ने उप तहसीलदार चंदा कुंवर की मेडिकल टीम के साथ अस्पताल का निरीक्षण किया. मेडिकल स्टोर चलाने के लिए साइट पर किसी के पास डॉक्टर,  नर्सिंग स्टाफ और फार्मासिस्ट की डिग्री नहीं थी. अस्पताल और मेडिकल स्टोर पूरी तरह से अवैध रूप से चल रहे थे. टीम ने उन्हे पकड़ लिया. आगे की कार्रवाई के लिए सीएमएचओ व उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा. इस संबंध में टीम ने संचालक के खिलाफ बकारिया थाने में मामला भी दर्ज कराया है. ग्रामीणों के अनुसार संचालक अस्पताल की आड़ में लोगों की जिंदगी से खेल रहा है.

लंबे समय तक आम जनता ने इसकी शिकायत अधिकारियों से की.  लेकिन फिर भी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के संरक्षण में अवैध रूप से अस्पताल और मेडिकल चलाए जा रहे हैं. ग्रामीणों ने यह भी कहा कि टीम व नवनियुक्त उप तहसीलदार चंदा कुंवर ने कार्रवाई की तो उच्चाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने भी कार्रवाई रोकने का दबाव बनाया लेकिन सफल नहीं हो सके.

रिसेप्शनिस्ट करते हैं मरीजों का इलाज

अस्पताल में रिसेप्शनिस्ट के साथ मरीजों का इलाज कर रही थी. इसके साथ ही वह मरीजों को ड्रिप भी दे रही थीं. इधर, मेडिकल स्टोर में लगभग सभी दवाएं एक्सपायरी डेट से आगे रखी हुई थीं. हैरानी की बात यह है कि अस्पताल में न तो मेडिकल ऑपरेशन का वैध लाइसेंस था और न ही वैध डिग्री वाला डॉक्टर.

विभिन्न जांच के नाम पर निर्दोष लोगों से हजारों रुपये ठगे जा रहे थे. ऑपरेटर भरतलाल बेंदा ने बी.टेक किया और उनके पास कोई वैध डिग्री या दस्तावेज नहीं है. ग्रामीणों का आरोप है कि भरत लाल अपने प्रभाव के आधार पर लंबे समय से मातृछाया नाम का एक अवैध अस्पताल चला रहा था.  आसपास के आदिवासी इलाकों से आने वाले लोगों को अवैध अस्पतालों में लूटा गया.

आदिवासी इलाकों में लूट आसान है

कोटरा,  गोगुंडा,  सायरा क्षेत्र में हजारों की संख्या में अवैध क्लीनिक है. झोलाछाप गरीब आदिवासी क्षेत्र को लूटकर जनता के साथ खेल खेल रहे हैं. जब 7 दिन पहले सेमाड़ गांव में कक्षा 9 में पढ़ने वाले छात्र की मौत ने गुंडागर्दी की पोल खोल दी थी. इधर घोघाचप प्रदीप को गलत इंजेक्शन लगने से छात्र की मौत हो गई.  लेकिन जनप्रतिनिधियों ने कोई ठोस कार्रवाई करना उचित नहीं समझा. दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया.

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