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राजस्थान: साबरमती-सेई नदी के बांध का आदिवासी क्यों कर रहे हैं विरोध

Posted on November 30, 2022 - 11:54 am by

राजस्थान सरकार ने उदयपुर के आदिवासी अंचल कोटडा की सेई और साबरमती नदी पर बनने वाले बांध के लिए वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी है. इसके साथ ही बाधों के निर्माण का विरोध कर रहे आदिवासी समुदाय के लोग और क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों ने उपखंड कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालिन धरना शुरू कर दिया है.

40 हजार से अधिक आदिवासियों के विस्थापन का डर

बांध निर्माण का विरोध कर रहे आदिवासियों के अनुसार सरकार के इस निर्णय से कोटडा क्षेत्र की 10 ग्राम पंचायत सीधे तौर से प्रभावित हो रही है. जिसका व्यापाक असर यहां रहने वाले 40 हजार से अधिक परिवार के लोगों पर होगा और उन्हे अपने ही घर और जमीनों से विस्थापित होना होगा. ऐसे में इतने लोगों के पुर्नवास की भी पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई है. ऐसे में क्षेत्र के लोग और जन प्रतिनिधि बांधों के निर्माण का निर्णय वापस लेने की मांग पर अडे हुए है.

स्क्रीनशॉट/फेसबूक

क्या है सरकार की योजना

इन बांधों से सरकार पाली और सिरोही जिले के 750 से अधिक गांवों में पेयजल संकट को दूर करने की योजना बना रही है. इसके लिए उदयपुर के आदिवासी अंचल कोटडा से निकल रही सेई और साबरमती नदी पर बांधों के निर्माण का फैसला लिया है.

सेई और साबरमती नदी पर बन रहे बांधों से पानी प्रेशराईज पाइप लाइन, ग्रेविटी पाइप लाइन और टनल के माध्यम से जवाई बांध में छोड़ा जाएगा. जलाशयों का निर्माण पूर्ण होने पर पाली जिले के 9 कस्बे (पाली, रोहट, जैतारण, सुमेरपुर, बाली, देसूरी, सोजत, रायपुर, मारवाड़ जंक्शन), 560 गांव एवं सिरोही जिले के शिवगंज कस्बे के साथ ही 178 गांवों की पेयजल व्यवस्था भी सुदृढ़ हो पाएगी.

सीएम अशोक गहलोत ने वर्ष 2022-23 के बजट में पाली और सिरोही जिले में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने के लिए उदयपुर की कोटड़ा तहसील में सेई और साबरमती नदी पर जलाशयों के निर्माण की घोषणा की थी.

लंबे समय से आदिवासी कर रहे हैं बांध के निर्माण का विरोध

बांधों के निर्माण का विरोध कर रहे आदिवासी समुदाय के लोग और जन प्रतिनिधियों ने कोटडा कस्बे में रैली निकाली और उपखंड कार्यालय पहुंच गए. जहा पहले तो उन्होने जम कर नारेबाजी कर सरकार के निर्णय पर विरोध दर्ज कराया. इसके बाद तमाम लोग अपनी मांग को लेकर अनिश्चितकालिन धरने पर हैं. लम्बे समय से बांधों के निर्माण का विरोध कर रहे आदिवासियों और प्रशासन के बीच वार्ता का दौर चला. हर बार आदिवासी समुदाय के लोगों को मनाने में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी विफल रही. बावजुद इसके सरकार ने 28 नवंबर को बांधों के निर्माण के लिए सरकार की ओर से 2554.23 करोड़ रूपए की वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी है. जिसकी जानकारी मिलते ही कोटडा क्षेत्र के आदिवासियों को गुस्सा फूट पड़ा है.

अनिश्चितकालीन धरने से बढ़ी प्रशासन की चिंता

उदयपुर में जिला प्रशासन के अधिकारी 5 से 7  दिसम्बर तक आयोजिन होने वाली जी 20 देशों की शेरपा बैठक की तैयारियों में जुटे हुए है. ऐसे में आदिवासी समुदाय के लोगों का उपखंड कार्यालय के बाहर अनिश्चित कालिन धरने पर बैठने से प्रशासनिक अधिकारियों की चिंता बढ गई है. हालाकि धरने पर बैठने से पहले अधिकारियों ने आन्दोलनकारी लोगों को समझाने का प्रयास किया. लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे हैं.

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