Skip to main content

आदिवासियों को धर्म के नाम पर RSS व BJP द्वारा बांटने की कोशिश: लोकतंत्र बचाओ 2024 अभियान

Posted on March 18, 2024 - 3:29 pm by
आदिवासियों को धर्म के नाम पर RSS व BJP द्वारा बांटने की कोशिश: लोकतंत्र बचाओ 2024 अभियान

लोकतंत्र बचाओ 2024 (अबुआ झारखंड, अबुआ राज) अभियान ने सत्य भारती, रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये उन्होंने आगामी लोक सभा चुनाव, लोकतंत्र की स्थिति और राज्य की सामाजिक-राजनैतिक ज़मीनी वास्तविकता पर अपनी बात रखी. सभा ने कहा कि लोकतंत्र बचाओ 2024 अभियान झारखंड में लम्बे समय से जन मुद्दों पर संघर्ष कर रहे अनेक संगठनों व सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक साझा पहल है.

सभा ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि, आदिवासी समाज एकमत है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में जल, जंगल, ज़मीन, खनिज के संरक्षण से जुड़े जन पक्षीय कानूनों और प्रावधानों को ख़तम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि,आरएसएस व भाजपा द्वारा आदिवासियों को सरना – ईसाई के नाम पर बांटने की कोशिश की जा रही है.

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा की इस बंटवारे की नीति को आदिवासी समुदाय समझ चूका है. साथ ही सभा ने मुख्यमंत्री के गिरफ़्तारी को लेकर भी ब्यान दिया. सभा ने कहा कि हाल में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को फर्जी आरोप पर गिरफ्तार किये जाने पर आदिवासी समुदाय में व्यापक आक्रोश है.

वक्ताओं ने बताया कि अभियान पिछले एक साल से राज्य भर में 2024 लोकसभा चुनाव के परिप्रेक्ष में लोगों के साथ संवाद व जन जागरण कार्यक्रम जैसे जन सभा, यात्रा, सम्मेलन आदि कर रहा है. यह अभियान झारखंड की एकमात्र राज्य-व्यापी पहल है जो मोदी सरकार की राजनीति और उनके लोकतंत्र व लोगों पर प्रभाव पर ज़मीनी संघर्ष व संवाद कर रही है.

उन्होंने बताया कि, पिछले एक साल से राज्य के विभिन्न लोक सभा क्षेत्रों में यात्राओं व सभाओं से यह बात साफ़ है कि जनता, खास कर के आदिवासियों, दलितों व मेहनतकाश वर्ग के अन्य लोगों, में मोदी सरकार के विरुद्ध व्यापक आक्रोश है. लोग मोदी सरकार के विरुद्ध तीन मुद्दे लगातार उठा रहे हैं. उन्होंने कहा, पिछले 10 सालों में कई वादों का महज़ जुमला ही मिला है.

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा द्वारा विभिन्न जन अधिकारों को खतम किया जा रहा है. साथ ही गांव-समाज में धर्म के नाम पर हिंसा व साम्प्रदायिकता में बढ़ौतरी हुई है. मोदी सरकार द्वारा आरक्षण प्रावधानों को कमज़ोर करने और सरकारी नौकरियों के निजीकरण को लेकर दलित और पिछड़े समुदाय में ख़ास आक्रोश दिख रहा है. युवा रोज़गार न मिलने का सवाल भी हर जगह उठा रहे हैं.

No Comments yet!

Your Email address will not be published.