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कजली सोरेन को संथाली भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार

Posted on December 23, 2022 - 1:18 pm by

साहित्य अकादमी ने 22 दिसंबर को अकादमी पुरस्कार 2022 की घोषणा की है. जिसमें संथाली भाषा और साहित्य के लिए यह पुरस्कार प. बंगाल के खतड़ा, बांकुड़ा निवासी कजली सोरेन उर्फ जगन्नाथ सोरेन को प्रदान किया गया है.

कजली सोरेन का कहना है कि इस पुरस्कार को पाने की ख्वाहिश कई वर्षों से थी. अब जाकर दिल को सुकून मिला है. कजली को साहित्य अकादमी पुरस्कार उनकी कविता संग्रह “साबरनका बालिरे सानन पंजय(स्वर्णरेखा नदी किनारे बालू में सोना ढूंढेंगे)” के लिए मिला है. इसे 2019 में प्रकाशित किया गया था. इस कविता संग्रह में 350 कविताएं है, पुस्तक की थीम भले ही लेखक को स्वर्णरेखा नदी में सोना मिलता है, लेकिन इसमें मानवता और समाज दोनों का मानवीय तरीके से जिक्र किया गया है.  इस कविता संग्रह को चर्चा और आलोचना जरूर मिली. जिसके कारण वर्तामन में अन्य कविता संग्रह पर काम किया जा रहा है.

वर्तमान में जगन्नाथ सोरेन की उम्र 72 वर्ष है. उनका जन्म 19 अगस्त 1950 में हुआ था. वे 1968-69 से ही कविता लिखना शुरू कर चुके थे. उनके परिवार में पत्नी और तीन बेटियां है.

23 भारतीय भाषाओं के निर्णायक समिति ने किया चयन

कजली की संथाली काव्य संग्रह को सर्वोत्तम मानते हुए 23 भारतीय भाषाओं की निर्णायक मंडली ने साहित्य अकादमी साहित्य अकादमी पुरस्कार की अनुशंसा की. समिति के अध्यक्ष डी चंद्रशेखर कंवार की अध्यक्षता के कार्यकारी मंडल ने पुरस्कार की घोषणा की. कजली सोरेन को पुरस्कार स्वरूप उत्कीर्ण ताम्रफलक, शॉल और एक लाख रूपये नकद सम्मान समारोह में भेंट की जायेगी. इंडियन ऑयल हल्दिया से सेवानिवृत होने के बाद कजली सोरेन का समय लेखनी में ही बीतता है. कजली ने बांकुड़ा से बीएससी तक पढ़ाई की. इससे पूर्व नौ और कविता संग्रह प्रकाशित कर चुके हैं.

कजली सोरेन की कविता संग्रह

कजली सोरेन की कविता संग्रह की सूची –

  • चाचो दीदी (कविता) – 1982
  • गेगोम (कविता) – 1984
  • दुली चेतन (कविता) – 1993
  • लानदायमे चांपा बाहा (कविता) – 2009
  • ओजोग काटे मानमी उमुल (कविता) – 2012
  • लेतका (अनुवाद) – 2013
  • बुधी पारकोम हानासा – 2019
  • सोबरनका बालिरे सानन पंजय (कविता)

अर्जुन मुंडा ने दी बधाई व शुभकामनाएं

आदिवासी मामलों में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने ट्वीटर पर कजली सोरेन को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि “संताली” भाषा का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिलना जनजातीय समाज के लिए प्रेरणा स्त्रोत है.

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