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संताल आदिवासियों  ने हर्षोल्लास से मनाया बेलबोरोन बोंगा

Posted on September 30, 2022 - 8:50 am by
Belboron bonga

झारखंड में संताल आदिवासी इन दिनों बेलबोरोन बोंगा (पूजा) मना रहे हैं। बेलबोरोन बोंगा में संताल आदिवासी धरती को, धरती के जीवों को कष्ट और बीमारियों से बचाने के लिए करते हैं। यह पूजा आदिवासियों की ज्ञान परंपरा को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने से भी जुड़ी है। झारखंड की उपराजधानी दुमका के भुरकुंडा पंचायत के लेटो गांव में दिशोम मराङ बुरु युग जाहेर अखड़ा और ग्रामीणों ने बेलबोरोन पुजा बहुत धूमधाम से मनाया ।

क्या है बेलबोरोन पूजा की मान्यता

इसके पीछे संताल आदिवासियों की मान्यता है कि जब धरती में मनुष्यों द्वारा किया गया पाप बहुत बढ़ गया था तो इष्ट देवता ठकुर ने 12 दिन और 12 रात सेगेल दाह (अग्नि वर्षा) धरती के सिंगबीर और मानबीर में गिराये और इसके साथ-साथ पुहह (जीवाणु/वायरस) भी छोड़े और मनुष्य जाति को ख़त्म करने का निर्णय भी किया । जब यह बात इष्ट देवी ठकरन को पता चला तो उसने इष्ट देव ठकुर से कही, ये सभी हमारे ही बच्चे है इन सभी को नाश नहीं करे। ऐसा करने से हमें ही हानि होगी । इसके लिये मैं लिटह (मराङ बुरु) से बात करुंगी और हम दोनों मिलकर मनुष्यों को धर्म के रास्ते वापस लाएंगे। इसके लिये ठकरन ने लिटह (मराङ बुरु) को मोनचोपुरी(पृथ्वी लोक) से शिरमापुरी(देवलोक) बुलायी और कही – मनुष्य पाप के रास्ते चल पड़ा है जिस कारण ठकुर इन मानव जाति को नाश करने वाले हैं। ठकुर का संदेश है कि हम दोनों (ठकुर और ठकरन) का सपाप(आभूषण और वस्त्र) मोनचोपुरी(पृथ्वीलोक) ले जाएं और मनुष्य दशांय नृत्य और गीत के माध्यम हमारा गुणगान करें। मेरा सुनुम-सिंदुर(तेल-सिंदुर)ले जाये और गांव-गांव घुमायें। मेरा सपाप(आभूषण और वस्त्र) साड़ी, शंका, काजल आदि और इष्ट देव ठकुर का सपाप(आभूषण और वस्त्र) लिपुर, पैगोन, मोर पंख आदि ले जाये। कुछ लोग मेरा सपाप(आभूषण और वस्त्र) पहने और कुछ लोग इष्ट देव ठकुर का सपाप(आभूषण और वस्त्र) पहने और दशांय नृत्य और गीत के माध्यम हमारा गुणगान करे। ऐसा करने पर इष्ट देव ठकुर खुश हो जाएंगे, उन्हें बिश्वास हो जायेगा कि मनुष्य पाप छोड़ धर्म के रास्ते चल पड़ा है, तब वे मनुष्य जाति का नाश नहीं करेंगे। इष्ट देवी ठकरन ने लिटह (मराङ बुरु) से यह भी कहा कि मैं 12 गुरु बोंगाओ (गुरु देवताओ)को भी मोनचोपुरी(पृथ्वी लोक) जाने के लिये कहूंगी जो अपने-अपने कार्य क्षेत्र में निपुण है। जैसे धरोम गुरु बोंगा – धर्म और धन के लिए, कमरू गुरु बोंगा – रोग मुक्ति के लिए, भुवग गुरु बोंगा- नृत्य, संगीत के लिए आदि इन सभी गुरु बोंगा को घर-घर घुमाओ, इससे इष्ट देव ठकुर के माध्यम से मनुष्य जाति को ख़त्म करने के लिए छोड़े गए पुहह(जीवाणु/वायरस) के माध्यम से जो बीमारी फैली है वह इन गुरु बोगाओ(गुरु देवताओ)के माध्यम से खत्म हो जायेगा। इन गुरु बोगाओ(गुरु देवताओ) के माध्यम से मनुष्य बीमारियों का इलाज, दवा, जड़ी-बुटी, धर्म, तंत्र – मंत्र आदि सिखेगा। मोनचोपुरी(पृथ्वीलोक) में मनुष्य गुरु बोगाओ से गुरु-शिष्य का सम्बंध स्थापित कर हमारा गुणगान करे। आगे ठकरन ने कहा मैं दशांय चांदु (संताली महीना) के छठवां दिन(6th Day)को मोनचोपुरी(पृथ्वीलोक) में गुरु बोगाओ(गुरु देवताओ) के साथ अवतरित होगी, इस दिन को पूजा करे। इस दिन को संताल आदिवासी बेलबोरोन पुजा करते हैं।

बेलबोरोन बोंगा(पूजा) में इन देवताओं की पूजा होती है

इस बेलबोरोन पुजा में धरोम गुरु बोंगा, कमरू गुरु बोंगा, भुवग गुरु बोंगा, कांशा गुरु बोंगा, चेमेय गुरु बोंगा, सिद्ध गुरु बोंगा, सिदो गुरु बोंगा, रोहोड़ गुरु बोंगा, गांडु गुरु बोंगा, भाइरो गुरु बोंगा, नरसिं गुरु बोंगा, भेन्डरा गुरु बोंगा की पूजा के साथ साथ मारांग बुरु, मोड़ेकु तुरुयकु आदि का पूजा करते हैं और मुर्गा बलि दी जाती है। खिचड़ी प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते हैं। बेलबोरोन पुजा के एक सप्ताह पहले से गुरु-शिष्य गांव मे आखड़ा बांधते है जहां गुरु शिष्यो को मंत्र की सिद्धी, परंपरागत चिकित्सा विधि आदि का ज्ञान देते हैं। इसी दौरान गुरु-शिष्य पहाङ सहित कई जगहों पर जड़ी-बुटी के खोज में जाते हैं। जहाँ गुरु-शिष्यो को जड़ी-बुटी की पहचान और उसका उपयोग किन बीमारियो में किया जाता है का ज्ञान दिया जाता है। बेलबोरोन पुजा के दुसरे दिन से तीन दिन लगातर गुरु-शिष्य गुरु बोंगाओ को लेकर गांव-गांव घुमाते है और दशांय नृत्य और गीत के माध्यम इष्ट देव ठकुर और इष्ट देवी ठकरन का गुणगान गाते हैं और साथ –साथ भक्तों के घर में सुख, शांति, धन आदि के लिए पुजा करते हैं। बेलबोरोन पुजा के चौथा और अंतिम दिन अपने गांव मे दशांय नृत्य और गीत करते हैं। इस तरह संतालो का बेलबोरोन पुजा गुरु-शिष्य का अटूट सम्बन्ध का पूजा है। जो हमें पाप नहीं करने, धार्मिक बने रहने, समाज को रोग मुक्त बनाये रखने, परंपरागत जड़ी-बुटी चिकित्सा विधि को जीवित रखने, परंपरागत नाच गाने को बचाये रखने, इष्ट देवताओ पर अटूट विश्वास रखने  और खुश रहने का संदेश देता है। बेलबोरोन पुजा गुरु-शिष्य का पूजा है।

संताल आदिवासियों ने बेलबोरोन पूजा के लिए छुट्टी की मांग की है

आदिवासियों और लोगों के बीच शिक्षा की जागरुकता के लिए आखड़ा ने झारखण्ड सरकार से मांग की है कि बेलबोरोन पुजा में राज्य स्तरीय छुट्टी दिया जाए। इस पूजा में गांव के मंझी बाबा सुनील टुडू, गुरु बाबा काहा मरांडी, जोमोल मरांडी, निसील मरांडी, जोहोन टुडू, सुराय टुडू, सोम किस्कू, लुखिराम टुडू,मिस्त्री मरांडी, रंजीत टुडू, रुबिलाल मुर्मू, मनोज मुर्मू, फिरोज टुडू, एलबेन्स किस्कू, लुखिराम मरांडी, सोनालाल मरांडी, कार्तिक मरांडी आदि शामिल थे।

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