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दादरा एवं नगर हवेली और दमन और दीव में दो सालों से बंद है छात्रवृति

Posted on March 11, 2023 - 4:02 pm by

जनगणना 2011 के अनुसार  दादरा और नगर हवेली में कुल जनसंख्या 343,709 जिसमें अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या 178,564 है, वहीं दमन और दीव की कुल जनसंख्या 243247 जिसमें आदिवासियों की जनसंख्या 6.32 फीसदी है.

वित्तीय वर्ष 2019-20 में प्री मैट्रिक के लिए और वर्ष 2017-21 में पोस्ट मैट्रिक के एसटी छात्रों के लिए राशि जारी किए गए थे.

इन क्षेत्रों से संबंधित सवाल दादरा एवं नगर हवेली से सांसद कलाबेन मोहनभाई देलकर जनजातीय कार्य मंत्रालय से पूछा था. जिसमें उन्होंने पूछा था कि दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव के आदिवासी क्षेत्रों में कौन से योजनाएं संचालित की जा रही है. इन योजनाओं को ठीक से चलाने के लिए क्या कदम उठाये गए है और जनजातीय साक्षरता स्तर में सुधार लाने के लिए कौन से कदम उठाये जा रहे हैं.

केंद्रीय जनजातीय मामलों में राज्य मंत्री रेणुका सिंह सरूता ने जवाब में बताया कि केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय आदिवासियों के सामाजिक-आर्थिक विकास और कल्याण के लिए कई योजनाए चला रही है. जिसमें प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना, संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत विशेष अनुदान, विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूहों के विकास के लिए शिक्षा, आवास. भूमि वितरण, भूमि विकास, कृषि विकास,   पशुपालन आदि गतिविधियां, जिसमें 75 चिंहित पीवीटीजी को कवर करती है,

प्री, पोस्ट मैट्रिक, ओवरसीज छात्रवृति के अलावा फेलोशिप योजनाए चलायी जा रही है, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन, टीआरआई, जनजातीय त्योहार, अनुसंधान सूचना एवं जनशिक्षा आदि शामिल है.

इसके अलावा सरकार आदिवासी बहुल क्षेत्रों के विकास के लिए दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव के ग्रामीण प्रधानमंत्री आवास योजना में कार्यान्वयन के बाद से 53.25 करोड़ रूपये औऱ शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना में 36 करोड़ रूपये आवंटित की है. वित्तीय वर्ष 2022-23 में पीएम पोषण अभियान के लिए 3 करोड़ 22 लाख 31 हजार रूपये, आंगनबाड़ी सेवाओं के लिए 18 करोड़ 28 लाख 38 हजार रूपये, मनरेगा के लिए 80 लाख 93 हजार रूपये, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका योजना के लिए 371 जनजातीय स्वयं सहायता समूहों को 51.95 लाख रूपये वितरित किए गए हैं.

वित्तीय वर्ष 2019-20 में प्री मैट्रिक के लिए एसटी छात्रों को 37 करोड़ 77 लाख और वर्ष 2017-21 में पोस्ट मैट्रिक के एसटी छात्रों के लिए 41 करोड़ 71 लाख जारी किए गए थे.

वहीं राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के लिए 10 करोड़ 14 लाख रूपये जारी किए गए थे. 

जनजातीय मामलों में केंद्रीय राज्य मंत्री ने आगे बताया कि आदिवासियों के साक्षरता स्तर में सुधार लाने के लिए स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए समग्र शिक्षा अभियान कार्यान्वित कर रहा है. भारत में अधिकांश बच्चे दो गंभीर समस्या से जुझ रहे हैं. जो भूख और शिक्षा है. जिसके समाधान के लिए पोषण की स्थिति में सुधार करके पीएम पोषण योजना भी लागू कर रहा है. साक्षरता में सुधार के लिए राज्य स्तरीय पहलों में नए स्कूलों का निर्माण और अत्याधुनिक सुविधा, नियमित भर्तियों के माध्यम से योग्य शिक्षक प्रदान करना, ड्राप-आउट कम करने के लिए मध्यान भोजन और छात्रवृति को बढ़ावा देना, स्मार्ट क्लास रूम के माध्यम से डिजीटल शिक्षा को बढ़ावा देना आदि शामिल है.

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