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NCST ने डांटा तो महाराष्ट्र के डीएम ने बेचे गए आदिवासी बच्चों को छुड़ाने की शपथ ली

Posted on January 28, 2023 - 5:52 pm by

नासिक और अहमदनगर के जिला अधिकारी (डीएम) 27 जनवरी को नई दिल्ली में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) के समक्ष पेश हुए. पैनल ने कई मामलों में उचित कार्रवाई करने में विफल रहने के लिए उनकी गिरफ्तारी की मांग की थी, जो कातकरी समुदाय के बच्चों को ₹5,000 और एक भेड़ के लिए बंधुआ मजदूरी में बेचे जाने से संबंधित था. इसमें 30 से अधिक बच्चे कथित तौर पर प्रभावित हुए हैं.

दोनों जिलों के जिलाधिकारियों (डीएम) और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) ने एनसीएसटी के समक्ष हलफनामे दाखिल किए, जिसने दीवानी अदालत के रूप में अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए उनकी गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था. अहमद नगर के एसपी राकेश ओला और नासिक ग्रामीण एसपी शाहजी उमाप ने अपने हलफनामे में शपथ ली कि वे कातकरी समुदाय, एक अनुसूचित जनजाति और अन्य विशेष रूप से कमजोर लोगों के ऐसे सभी बच्चों को ट्रैक करने और बचाने के लिए समर्पित बचाव दल बनाएंगे. जनजातीय समूह (पीवीटीजी) 15 दिनों के भीतर बंधुआ मजदूरी के रैकेट में फंसे बच्चों को रेस्क्यू किया जाएगा.

डीएम और एसपी के खिलाफ वारंट जारी किया गया था

इस महीने की शुरुआत में उनकी गिरफ्तारी का वारंट जारी करते हुए एनसीएसटी ने कहा था कि लापता बच्चों में से आधा दर्जन से भी कम पाए गए हैं. पैनल ने दर्ज एफआईआर में बाल श्रम कानूनों और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत आरोप नहीं लगाने के लिए जिला अधिकारियों की भी खिंचाई की. इसने यह भी बताया था कि सभी मामले प्राथमिकी के रूप में दर्ज नहीं किए गए थे.

15 दिन के अंदर में आयोग को भेजेंगे रिपोर्ट

अपने हलफनामों में एसपी ने कहा कि वे बंधुआ मजदूर रैकेट को अच्छी तरह से देखेंगे. ऐसे सभी मामलों में मामले दर्ज करेंगे और इन मामलों पर एक-दूसरे के साथ समन्वय करने की शपथ लेंगे. दोनों ने प्रस्तुत किया है कि वे 15 दिनों के भीतर एक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट आयोग को भेजेंगे.

इसके अलावा नासिक के डीएम  गंगाधरन डी. और अहमदनगर के डीएम राजेंद्र बी. भोसले ने अपने हलफनामे में कहा कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि बचाए गए ऐसे सभी बच्चों का राज्य और केंद्रीय सामाजिक कल्याण उपायों के अनुसार पुनर्वास किया जाए. उन्हें कानून के तहत मुआवजा प्रदान किया जाए.

एसटी/एससी एक्ट एवं बाल श्रम कानून में ऐसी किसी भी घटना को रोकने के लिए 15 दिनों के भीतर आवश्यक कार्यवाई की जाती हैं. जिससे भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को रोका जा सके.

डीएम ने कहा कि वे यह भी सुनिश्चित करेंगे कि कातकरी समुदाय के सभी सदस्यों और अन्य पीवीटीजी को उनके संबंधित जिलों में जल्द से जल्द जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जारी किया जाए. उन्होंने यह भी प्रस्तुत किया कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी सरकारी लाभ समय पर उन तक पहुंचें. वे पहले से ही बचाए गए बच्चों को तीन दिनों के भीतर मुआवजा प्रदान करेंगे तथा इस पर पांच दिनों के भीतर आयोग को एक रिपोर्ट भेजेंगे. इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस रैकेट के संबंध में एक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट 15 दिनों में एनसीएसटी को सौंपी जाएगी.

बता दें कि पिछले साल सितंबर में एक आदिवासी लड़की की मौत के बाद सामने आया था. जिसमें नासिक में आदिवासी माता-पिता के द्वारा 10 हजार रूपये प्रतिवर्ष तक की रकम और एक बकरी/भेड़ करने के बदले अपने बच्चों को एजेंट के माध्यम से गड़रियों को दे दिया था. गडेरियों के द्वारा भेड़-बकरियों की रखवाली करवायी जा रही थी. दरअसल नासिक में कोविड-19 के कारण आजीविका के संकट के कारण एक आदिवासी समुदाय के लोग अपने बच्चों को 10 हजार के बदले श्रमिक के रूप में काम करने के लिए गड़ेरियों को दे रहे थे. नासिक पुलिस के अनुसार अब तक आठ बच्चों को गड़ेरियों के चंगुल से मुक्त कराया गया है. दरअसल मजदूर के रूप में काम करने वाली एक 11 वर्षीय आदिवासी बच्ची की मौत हो जाने के कारण यह मामला प्रकाश में आया. उसकी मौत की जांच से पता चला कि पिछले कुछ वर्षों में लगभग 30 आदिवासी बच्चों को 5,000 रुपये और प्रत्येक भेड़ के लिए बेचा गया था.

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