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सिक्किम के सांसद ने संसद में 12 समुदायों को एसटी दर्जा देने की मांग उठाई

Posted on December 17, 2022 - 2:54 pm by

विजय उरांव

मैंने सदन को आदिवासी समुदाय की भाषाओं और बोलियों के संरक्षण और विकास के महत्व से भी अवगत कराया. यह महत्वपूर्ण है कि इस कार्य में क्षेत्रीय संस्थानों को शामिल किया जाना चाहिए. यह केवल सामाजिक और आर्थिक विकास के बारे में नहीं है बल्कि पहचान के संरक्षण के बारे में भी है. सिक्किम के एक मात्र सांसद इंद्र हांग सुब्बा ने सोशल मीडिया में कही.

बता दें कि लोकसभा सांसद इंद्र हांग सुब्बा ने 15 दिसंबर को संसद में एक विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए सिक्किम के 12 छूटे हुए समुदायों की लंबित जनजातीय स्थिति की मांग को उठायी थी. सुब्बा ने संसद को एसटी सूची में शामिल करने के लिए अपने राज्य के 12 समुदायों की लंबित मांग के बारे में याद दिलाया. वे संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (तीसरा संशोधन) विधेयक 2022 पर संसदीय चर्चा में भाग ले रहे थे, जिसका उन्होंने स्वागत किया.

बाकी समुदाय भी जनजातीय लक्षणों को साझा करते हैं

इंद्र हांग सुब्बा ने संबंधित केंद्रीय मंत्री को बताया कि हाल ही में एसटी सूची में शामिल समुदायों की तरह  सिक्किम के 12 समुदायों को अभी तक आदिवासी समुदायों के रूप में मान्यता नहीं दी गई है.

उन्होंने साझा किया कि भूटिया और  लेपचा समुदाय को 1978 में और  लिंबू और तमांग समुदायों को एसटी सूची में शिल किया गया था. इसके अलावा सिक्किम के बाकी समुदाय भी समान जनजातीय लक्षणों और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों को साझा करते हैं. बावजूद इसके अब तक 12 समुदायों को अब तक एसटी सूची में शामिल नहीं किया गया है.

आदिवासी समुदायों की पहचान की रक्षा करना भी जरूरी है

इंद्र हैंग ने कहा कि छुटे हुए समुदायों के लिए आदिवासी दर्जे की मांग कर रहे हैं और सिक्किम सरकार समय-समय पर केंद्र सरकार के सामने इस मुद्दे से अवगत कराती रही है. उन्होंने संबंधित केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि सिक्किम के बाकी समुदायों को न्याय दिलाने के लिए इस मुद्दे पर ध्यान दिया जाए.

सिक्किम के लोकसभा सांसद ने संसद में यह भी कहा कि एसटी का दर्जा सिर्फ सामाजिक-आर्थिक स्थिति के संदर्भ में न्याय लाने के लिए नहीं है.  बल्कि इन समुदायों की पहचान की रक्षा करना भी महत्वपूर्ण है.

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