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अंधविश्वास: बीमारी के इलाज के लिए 3 माह की मासूम को गर्म सलाखों से दागा

Posted on January 27, 2023 - 1:09 pm by

मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में अंधविश्वास से जुड़ा एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां अंधविश्वास के चक्कर में इलाज के नाम पर 3 माह की बच्ची को गर्म सलाखों से 51 बार गर्म सलाख से दागा गया. बच्ची की हालात नाजुक बनी हुई है. हालांकि उसे उपचार के लिए शहडोल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती किया गया है.

बच्ची को थी निमोनिया, अंधविश्वास में 51 बार गर्म लोहे से पेट में दागा

शहडोल जिले में आदिवासी समुदाय बड़ी संख्या में निवास करते है. आदिवासी समुदायों में आज भी बहुत-सी कुरीतियां और अंधविश्वास प्रचलित है. जिसके कारण कई तरह के अंधविश्वास देखने को मिलते हैं. इस जिले में पहले भी अंधविश्वास के कारण इलाज के नाम पर मासूम बच्चों को लोहे की गर्म सलाखों से दागने के कई मामले सामने आ चुके हैं.

ऐसी ही एक घटना फिर सामने आई है. जिसमें तीन माह की रचिता कोल इसकी शिकार हो गई. रचिता को निमोनिया और सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. जिसके कारण उसके परिजनों ने अस्पताल न ले जाकर अंधविश्वास में 51 बार गर्म सलाखों से पेट पर दागा. दागने के कारण बच्ची की तबियत और ज्यादा खराब हो गई. तबियत ज्यादा बिगड़ने पर उसे शहडोल के मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग में भर्ती कराया गया. बच्ची को जन्म के बाद से ही उसे निमोनिया ने घेर रखा था. उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है.

क्या है दगना प्रथा

शहडोल संभाग के कमिश्नर राजीव शर्मा ने दागने के खिलाफ अभियान चलाकर लोगों को समझाने की बात कही है. इसके साथ उनकी काउंसलिंग भी कराई जाएगी. राजीव शर्मा के अनुसार मध्यप्रदेश के आदिवासी इलाकों में अभी भी दगना प्रथा प्रचलित है. बच्चों को बीमार होने पर अस्पताल ले जाने की बजाय स्थानीय ओझा या गुनिया की मदद से तंत्र मंत्र से इलाज करते है. बीमार छोटे बच्चों को अमानवीय तरीके से गर्म सलाखों से दागा जाता है. हालांकि, प्रशासन बड़े पैमाने पर दगना कुप्रथा के खिलाफ जन-जागरण अभियान चला रहा है, पर इसका असर होता दिखाई नही दे रहा है.

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